हाइवे पर आवारा पशुओं से हादसे का खतरा : जयपुर-आगरा और जयपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर पर बचाव का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च, वाहनों के साथ जनहानि
जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं
खासकर रात के समय कोहरे और कम विजिबिलिटी में अचानक सामने आ जाने वाले पशु जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
जयपुर। राजस्थान में आवारा पशुओं की समस्या अब केवल शहरी अव्यवस्था तक सीमित नहीं रही, यह सड़क सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। जयपुर, अजमेर, अलवर, सीकर, भरतपुर जैसे शहरों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक, सड़कों पर घूमते गोवंश और अन्य मवेशी आए दिन हादसों की वजह बन रहे हैं। खासकर रात के समय कोहरे और कम विजिबिलिटी में अचानक सामने आ जाने वाले पशु जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
वाहनों के साथ जनहानि
राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए कई हादसों की जांच में सामने आया है कि तेज रफ्तार वाहनों और अचानक सामने आए आवारा पशुओं के टकराव से न केवल वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं, बल्कि कई बार यात्रियों की जान भी चली जाती है। ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों की ओर से खुले में छोड़े गए मवेशी और शहरी क्षेत्रों में गौशालाओं की सीमित क्षमता इस समस्या को और गंभीर बनाती है।
एनएचएआई का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च
इसी खतरे को देखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्टÑीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक पहल की है। सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत राष्टÑीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों को कम करने के लिए तत्क्षण सुरक्षा चेतावनी प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है। यह परियोजना फिलहाल जयपुर-आगरा और जयपुर-रेवाड़ी राष्टÑीय राजमार्ग कॉरिडोर पर लागू की गई है, जिन्हें आवारा पशुओं की अधिक आवाजाही वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
अलर्ट का मिलेगा संदेश
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत हाईवे उपयोगकर्ताओं को जोखिम वाले क्षेत्र से लगभग 10 किलोमीटर पहले लोकेशन-बेस्ड फ्लैश और वॉयस अलर्ट भेजे जाएंगे। अलर्ट का संदेश हिंदी में होगा, आगे आवारा पशु ग्रस्त क्षेत्र है। कृपया धीरे और सावधानी से चलें। इससे चालकों को समय रहते सतर्क होने का मौका मिलेगा और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
एक्सपर्ट की राय
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल तकनीकी चेतावनी पर्याप्त नहीं है। स्थानीय निकायों की ओर से प्रभावी पशु नियंत्रण, गौशालाओं का विस्तार, पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करना और सख्त जुर्माना जैसे कदम भी जरूरी हैं। जब तक प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सामाजिक सहयोग नहीं होगा, तब तक राजस्थान की सड़कें पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकतीं।

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