आरबीआई का रविवार को बैंक खोलने का आदेश वापस लेने की मांग, बैंक यूनियन नेता- 5-डे बैंकिंग लागू करने के बजाय कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश खत्म करना अनुचित
बैंक कर्मचारियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी जोखिम उठाकर ग्राहकों को सेवाएं दी थीं
जयपुर। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के बीच 27 सितंबर रविवार को बैंक शाखाएं खोलने के निर्देश को लेकर बैंक कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया है। ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाईज यूनियन एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय महासचिव सूरज भान सिंह आमेरा ने इसे श्रम विरोधी और अनुचित फैसला बताते हुए आरबीआई से आदेश वापस लेने की मांग की है।
आमेरा ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की 5-डे बैंकिंग की मांग लंबे समय से लंबित है। मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के बीच इस संबंध में लिखित समझौता होने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हड़ताल से कुछ दिन पहले रविवार को बैंक खोलने का निर्णय कर्मचारियों के बीच दबाव बनाने और उनकी एकता प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रविवार बैंक कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश है और इसे समाप्त करने का फैसला कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। आमेरा ने दावा किया कि बैंक कर्मचारियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी जोखिम उठाकर ग्राहकों को सेवाएं दी थीं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी ग्राहक सेवा के विरोधी नहीं हैं, बल्कि 5-डे बैंकिंग लागू होने से कार्य-जीवन संतुलन बेहतर होने के साथ बैंकिंग सेवाओं को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
आमेरा ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी को अवकाश के दिन जबरन शाखा में बुलाया जाता है तो यह श्रम कानूनों के तहत गंभीर विषय होगा। उन्होंने आरबीआई और सरकार से रविवार को बैंक खोलने का आदेश तत्काल वापस लेने तथा 5-डे बैंकिंग लागू करने की अधिसूचना जारी करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल में बैंक कर्मचारियों की एकजुटता और मजबूत होगी।

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