UPI MDR शुल्क स्थगित होने से त्यौहारी सीजन में चमकेगा व्यापार, आशीष सराफ ने कहा- 'सरकार का यह कदम सराहनीय'
त्योहारी सीजन में बढ़ेगा व्यापार का उत्साह
जयपुर। देश के डिजिटल भुगतान तंत्र में प्रस्तावित यूपीआई (UPI) मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के लागू होने की तिथि आगे बढ़ाए जाने की संभावना का व्यापार जगत ने जोरदार स्वागत किया है। व्यापारियों और आरतियों के प्रमुख संगठन 'आरतियां' के संरक्षक आशीष सराफ ने सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा शुल्क को स्थगित करने पर विचार करने के कदम को बेहद व्यावहारिक और समयोचित बताया है।
गौरतलब है कि पूर्व में 15 अक्टूबर, 2026 से ₹2,000 से अधिक के बड़े व्यापारी भुगतानों (P2M) पर 0.4% का MDR शुल्क लागू होना तय किया गया था। हालांकि, खुदरा विक्रेताओं और व्यापारी संगठनों के कड़े विरोध व त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार अब इसे आगामी 1 जनवरी, 2027 तक टालने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
त्योहारी सीजन में बढ़ेगा व्यापार का उत्साह: आशीष सराफ
संगठन के संरक्षक आशीष सराफ ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अक्टूबर से दिसंबर के दौरान देश में त्योहारों के कारण उपभोक्ता खर्च और खरीदारी में भारी उछाल आता है। ऐसे महत्वपूर्ण समय पर नया शुल्क लगाने से न केवल छोटे-बड़े व्यापारियों बल्कि मंडियों के काम-काज और आरतियों पर भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता। सरकार ने हमारी चिंताओं को समझा और इसे फिलहाल टालने का रुख किया है, जो सराहनीय है।" सराफ ने उम्मीद जताई कि इस स्थगन से नकदी संकट से जूझ रहे बाजारों को लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद मिलेगी और डिजिटल लेनदेन की गति भी प्रभावित नहीं होगी।
क्या था प्रस्तावित नियम ?
प्रस्तावित नियमों के तहत, ग्राहकों के लिए डिजिटल लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेगा और आम उपभोक्ताओं से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। हालांकि, दुकानदारों और व्यापारियों के लिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% का शुल्क (अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन की सीमा के साथ) लगाने का ढांचा तैयार किया गया था।

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