स्कूलों में किताबों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित, सीमित संसाधनों के सहारे बच्चों को पढ़ाने का प्रयास
किताबें उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी
प्रदेश में शिक्षा विभाग ने नया शैक्षणिक सत्र एक जुलाई से प्रारंभ कर दिया गया है, लेकिन अब तक कई सरकारी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। इसके चलते विद्यार्थियों को बिना किताबों के ही पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जयपुर। प्रदेश में शिक्षा विभाग ने नया शैक्षणिक सत्र एक जुलाई से प्रारंभ कर दिया गया है, लेकिन अब तक कई सरकारी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। इसके चलते विद्यार्थियों को बिना किताबों के ही पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। शिक्षक भी सीमित संसाधनों के सहारे बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष कक्षा 1 से 6 तक का पाठ्यक्रम बदला गया था। उस समय भी किताबों की आपूर्ति समय पर नहीं हो सकी थी, जिसके कारण अर्धवार्षिक परीक्षाओं तक विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं मिल पाई थीं।
ऐसे में बच्चों को बिना किताबों के ही परीक्षा देनी पड़ी थी, जिससे उनके परिणामों पर भी असर पड़ा था। इस वर्ष भी स्थिति में विशेष सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों ने विभाग से जल्द से जल्द पुस्तकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर किताबें उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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