यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा के लिए छोड़नी होगी अमेरिका पर पूर्ण निर्भरता, सिकोरस्की ने कहा- यूक्रेन पर हमला, यूरोप की शांति को खतरा
पुतिन को ठहराया युद्ध का जिम्मेदार
जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में फ्रंट लॉन पर आयोजित सत्र ‘ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस : रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी’ में पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेशी मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की की बातों ने पूरे फेस्टिवल को एक गंभीर वैश्विक विमर्श की ओर मोड़ दिया। यह सत्र केवल रूस-यूक्रेन युद्ध की चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें यूरोप की सामूहिक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय भरोसे की विश्वसनीयता और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन पर गहरी और स्पष्ट टिप्पणियां सामने आईं। सिकोरस्की की भाषा कूटनीतिक होने के बावजूद तीखी थी और उनके वक्तव्य यूरोप की वर्तमान चिंता और भविष्य की आशंकाओं को साफ तौर पर उजागर कर रहे थे।
जान बचाने को यूक्रेनी नागरिक पहुंचे पोलैंड :
यूक्रेन के पड़ोसी देश के रूप में पोलैंड की स्थिति पर बात करते हुए सिकोरस्की ने मानवीय संकट की गंभीर तस्वीर खींची। युद्ध शुरू होने के बाद लाखों यूक्रेनी नागरिक जान बचाने के लिए पोलैंड पहुंचे। इतने बड़े पैमाने पर शरणार्थियों के आवास, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतें सुनिश्चित करना आसान नहीं था, फिर भी पोलैंड ने इसे मानवीय दायित्व के रूप में निभाया।
सिकोरस्की ने 1994 के बुडापेस्ट ज्ञापन का किया जिक्र :
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सिकोरस्की ने 1994 के बुडापेस्ट ज्ञापन का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि शीत युद्ध के बाद यूक्रेन ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडारों में से एक को छोड़ दिया था। बदले में उसकी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया था।
पुतिन को ठहराया युद्ध का जिम्मेदार :
सिकोरस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह संघर्ष रणनीतिक विवशता से अधिक व्यक्तिगत अहंकार से प्रेरित है। पुतिन ने अपने गौरव और प्रभुत्व की भावना को अंतरराष्ट्रीय नियमों, संधियों और पड़ोसी देशों की संप्रभुता से ऊपर रखा है। यूक्रेन पर हमला केवल एक देश पर आक्रमण नहीं रहा। बल्कि इसने पूरे यूरोप की शांति और स्थिरता को खतरे में डाल दिया।

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