हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन घोटाले में चार आरोपियों को नहीं दी जमानत

टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य की पूरी भूमिका

हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन घोटाले में चार आरोपियों को नहीं दी जमानत
राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन के टेंडरों से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज। अदालत ने एक आरोपी अरुण श्रीवास्तव को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर सशर्त जमानत पर रिहा करने को कहा।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन के टेंडरों से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने एक आरोपी अरुण श्रीवास्तव को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर सशर्त जमानत पर रिहा करने को कहा है। जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने यह आदेश राजस्थान वाटर सप्लाई एंड सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड के तत्कालीन सचिव शुभांशु दीक्षित, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता निरिल कुमार, तत्कालीन मुख्य लेखाधिकारी एवं वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा तथा तत्कालीन मुख्य अभियंता स्पेशल प्रोजेक्ट्स दिनेश गोयल की जमानत याचिकाओं पर दिए। अदालत ने 27 मई को सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य थे और पूरी प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही है। निविदाओं के संबंध में गंभीर शिकायतें मिलने के बावजूद प्रक्रिया को जानबूझकर आगे बढ़ाया गया। इससे प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप प्रमाणित होते हैं। एसीबी की ओर से सात टेंडरों की जांच कर अदालत में करीब 16 हजार पेशज का आरोप पत्र पेश किया है, जबकि कुल 104 टेंडरों की जांच होनी है।

ऐसे में जांच के इस चरण पर आरोपियों को जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा। वहीं अदालत ने मामले के सह आरोपी तत्कालीन चीफ इंजीनियर अरुण श्रीवास्तव को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्वास्थ्य के आधार पर सशर्त जमानत प्रदान की है। अदालत ने आदेश दिया है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा, साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेगा, अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपेगा तथा ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी आयु 58 वर्ष से अधिक है और वह लंबे समय से गंभीर हृदय रोग से पीड़ित है। इसलिए मामले के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए केवल उनकी चिकित्सीय स्थिति को देखते हुए यह राहत दी गई है। 

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