सांभर झील में ऐसा क्या बदला कि हजारों फ्लेमिंगो ने यहीं बसाया अपना संसार? 4 हजार घोंसलों में पनप रही नई जिंदगी
सांभर झील में बसाने लगे अपना संसार
जयपुर। राजस्थान की सांभर झील प्रवासी फ्लेमिंगो (राजहंस) के लिए नया प्रजनन केंद्र बनकर उभरी है। इस साल यहां 4 हजार से अधिक घोंसले दर्ज किए गए हैं, जबकि 150 से ज्यादा चूजे भी देखे गए हैं। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छे मानसून के बाद झील में लंबे समय तक पानी रहने से फ्लेमिंगो को अनुकूल माहौल मिला। यही वजह है कि ये प्रवासी पक्षी इस बार यहां अधिक समय तक रुके और बड़ी संख्या में प्रजनन किया। सांभर झील में, फ्लेमिंगो अब सिर्फ़ बाहर से आने वाले मेहमान नहीं हैं। उनकी आबादी बढ़ रही है और वे अब यहाँ अपने बच्चे भी पैदा कर रहे हैं।
इस साल अनुकूल मौसम और पर्याप्त नमी के चलते सांभर झील में फ्लेमिंगो ने बड़ी संख्या में घोंसले बनाए और अंडे दिए। इन अंडों से अब चूजे भी निकल चुके हैं। पिछले साल अच्छी बारिश के कारण झील के आसपास दलदली जमीन लंबे समय तक बनी रही, जिससे पक्षियों को प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिला।
फ्लेमिंगो नर और मादा मिलकर अपनी चोंच से गीली मिट्टी इकट्ठा करते हैं और टीले या ऊंचे कटोरे जैसी आकृति के घोंसले तैयार करते हैं। झील के पानी में पनपने वाली शैवाल इनका प्रमुख भोजन है। यही वजह है कि घोंसलों वाले इलाकों में जलभराव और पर्याप्त भोजन की उपलब्धता इनके प्रजनन में अहम भूमिका निभाती है।

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