अस्पताल के चक्कर नहीं, अब घर पर ही इलाज और देखभाल; राजस्थान में सवा साल में 3 लाख से ज्यादा मरीजों को राहत
पेलिएटिव केयर से गंभीर रोगियों और बुजुर्गों को मिल रही सुविधा
जयपुर। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और बिस्तर पर रहने को मजबूर बुजुर्गों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें इलाज और देखभाल के लिए बार-बार अस्पताल जाने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। राजस्थान में होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के जरिए मरीजों को घर पर ही नर्सिंग सेवा, फिजियोथेरेपी, जरूरी दवाइयां और मानसिक-सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से सवा साल में तीन लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य गंभीर और असाध्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर जीवन-गुणवत्ता देना है। कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह सुविधा खासतौर पर उपयोगी साबित हो रही है। जिन बुजुर्गों और मरीजों के लिए अस्पताल पहुंचना मुश्किल है, उन्हें घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
98 अस्पतालों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक :
राज्य में 98 जिला अस्पतालों, उप जिला अस्पतालों और सेटेलाइट अस्पतालों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक स्थापित किए गए हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक इन सेवाओं के तहत करीब 2.51 लाख मरीजों को ओपीडी में परामर्श और उपचार मिला। इसी अवधि में 41 हजार से अधिक मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर इलाज और देखभाल दी गई।
गंभीर मरीजों को विशेषज्ञों की सलाह आसानी से मिल सके, इसके लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को दूर स्थित अस्पतालों तक जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
4 महीने में 43 हजार मरीजों को घर पर सेवा :
होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर की शुरुआत जुलाई 2025 में की गई थी। इसके तहत स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के घर जाकर उनकी जरूरत के मुताबिक देखभाल करते हैं। सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक करीब 43 हजार मरीजों को घर पर यह सुविधा दी गई। इनमें लगभग 20 हजार बुजुर्ग शामिल हैं।
इस सेवा में, मरीज की स्थिति के अनुसार नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, जरूरी दवाइयां और मानसिक, सामाजिक व आध्यात्मिक परामर्श दिया जाता है। इससे मरीजों के साथ उनके परिजनों को भी देखभाल में चिकित्सकीय सहयोग मिलता है।
‘राहत की किरण’ वाहन से घर पहुंच रही टीम :
मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहन की व्यवस्था की गई है। इसके जरिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी जरूरी दवाइयों के साथ मरीजों के घर पहुंचते हैं। टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं।
जरूरत पड़ने पर मरीज को विशेषज्ञ चिकित्सक से टेली-परामर्श भी दिलाया जाता है। इस व्यवस्था का मकसद मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार घर पर ही राहत और देखभाल उपलब्ध कराना है।
57 हजार केयर गिवर्स को प्रशिक्षण :
पेलिएटिव केयर सेवाओं का दायरा बढ़ाने के साथ सरकार प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी काम कर रही है। जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर का प्रशिक्षण दिया गया है।
इसके अलावा, 10 हजार एएनएम, 21 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ताओं और करीब 10 हजार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ) को भी प्रशिक्षित किया गया है। लक्ष्य है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी जरूरतमंद मरीजों को समय पर यह सुविधा मिल सके।
पीएचसी-सीएचसी तक सेवा पहुंचाने की तैयारी :
राज्य सरकार अब पेलिएटिव केयर सेवाओं को बड़े अस्पतालों से आगे बढ़ाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। इससे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
सरकार की इस पहल का फोकस केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि दर्द से राहत, मानसिक संबल और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना भी है। खासकर बुजुर्गों और लंबे समय से बीमार मरीजों के लिए घर पर देखभाल की यह व्यवस्था परिवारों का बोझ कम करने और मरीजों को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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