विश्व जनसंख्या दिवस : राजस्थान देश का छठा सबसे अधिक आबादी वाला प्रदेश, भारत की कुल आबादी में 5.87 प्रतिशत हिस्सेदारी
युवा शक्ति का सुनहरा अवसर या संसाधनों पर बढ़ता दबाव
जयपुर। राजस्थान की अनुमानित आबादी जुलाई 2026 तक 8.39 करोड़ (83.88 मिलियन) पहुंच चुकी है। यह केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाले सालों में राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार, जल संसाधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेतक भी है। तकनीकी समूह (राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग) के जनसंख्या प्रक्षेपण और नीति आयोग के जनसांख्यिकीय विश्लेषण बताते हैं कि राजस्थान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसकी सबसे बड़ी ताकत-युवा आबादी-यदि सही दिशा नहीं मिली तो वही सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकती है। हाल ही में जनगणना का प्रथम चरण हुआ है। इसलिए ये सभी आंकडे़ 2011 की जनगणना पर आधारित आधिकारिक जनसंख्या प्रोजेक्शन हैं।
देश का छठा सबसे अधिक आबादी वाला राज्य
राजस्थान अब देश का छठा सबसे अधिक आबादी वाला राज्य बन चुका है। जनसंख्या के मामले में यह तमिलनाड्डु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों से आगे निकल चुका है। देश की कुल आबादी में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब 5.87 प्रतिशत है। वर्ष 2026 में राज्य की अनुमानित वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर करीब 0.99 प्रतिशत आंकी गई है, जो राष्ट्रीय औसत से थोड़ी अधिक मानी जा रही है।
घनत्व कम, लेकिन दबाव तेजी से बढ़ रहा
राजस्थान का जनसंख्या घनत्व अभी भी करीब 240-245 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जबकि राष्ट्रीय औसत 415-434 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के बीच है। पहली नजर में यह राहत जैसा लगता है, लेकिन राज्य का बड़ा हिस्सा मरुस्थलीय होने और जल संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण वास्तविक दबाव कहीं अधिक है। पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे जिलों में पानी की कमी पहले से ही है।
शहर तेजी से फैल रहे, गांवों से पलायन जारी
राजस्थान की करीब 27 प्रतिशत आबादी (लगभग 2.23 करोड़) अब शहरों में रहती है। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर जैसे शहरों का तेजी से विस्तार हो रहा है। नई टाउनशिप, रिंग रोड, फ्लाईओवर, मेट्रो, औद्योगिक क्षेत्र और आवासीय परियोजनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वहीं कई ग्रामीण इलाकों में रोजगार की कमी के कारण युवाओं का पलायन जारी है।
राजस्थान एक दशक में लगा सकता है लंबी आर्थिक छलांग
राजस्थान की लगभग 63 प्रतिशत आबादी 15 से 59 वर्ष की आयु वर्ग में है। करीब 15 वर्ष पहले यह हिस्सा 58.1 प्रतिशत था। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस आबादी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार मिला तो राजस्थान अगले एक दशक में आर्थिक रूप से तेज छलांग लगा सकता है। लेकिन यदि पर्याप्त रोजगार नहीं बने तो बेरोजगारी और सामाजिक चुनौतियां बढ़
सकती हैं।
आबादी बढ़ने के साथ
पीने के पानी की मांग बढ़ेगी
भूजल दोहन और तेज होगा
सिंचाई पर दबाव बढ़ेगा
शहरी जलापूर्ति परियोजनाओं का विस्तार करना होगा
जल संरक्षण और पुनर्भरण को प्राथमिकता देनी होगी
2011 की जनगणना में राजस्थान की कुल साक्षरता 66.11 प्रतिशत थी। जबकि महिला साक्षरता केवल 52.12 प्रतिशत थी।
हालिया पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार राज्य की अनुमानित कुल साक्षरता करीब 75.8 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद महिला साक्षरता और उच्च शिक्षा में भागीदारी के मामले में अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
लिंगानुपात में सुधार
2011 की जनगणना में राजस्थान में प्रति 1000 पुरुषों पर 928 महिलाएं थीं। विभिन्न जनसंख्या प्रक्षेपणों के अनुसार यह अनुपात अब करीब 955 महिलाओं प्रति 1000 पुरुष तक पहुंचने का अनुमान है।
2036 तक क्या होगी तस्वीर
जनसंख्या प्रक्षेपण के अनुसार 2036 तक राजस्थान की आबादी लगभग 9.08 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि अगले एक दशक में राज्य को अभी से कई मोचोंर् पर तैयारी करनी होगी।
63%
आबादी कामकाजी उम्र की, लेकिन रोजगार, स्किल और उद्योग सबसे बड़ी चुनौती
2036 तक आबादी 9.08 करोड़ होने का अनुमान, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरों पर बढ़ेगा दबाव

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