राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस पॉलिसी-2026 : प्रदेश में बनेंगे विमान, रडार, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और मिसाइलें, निवेशकों को मिलेगी सात वर्षों तक विद्युत शुल्क में 100% छूट
डिफेंस हब बनेगा राजस्थान: एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 जारी
राजस्थान अब मिसाइल, ड्रोन और लड़ाकू विमानों का निर्माण केंद्र बनेगा। नई एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 के तहत निवेशकों को ₹1000 करोड़ तक के निवेश पर अल्ट्रा-मेगा प्रोत्साहन मिलेगा। 7 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100% छूट और स्टाम्प ड्यूटी में राहत के साथ प्रदेश मेक इन इंडिया को नई ऊँचाई देगा।
जयपुर। राज्य में विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल, एवियोनिक्स, सैटेलाइट बसें, बख्तरबंद वाहन, रडार, नेविगेशन, संचार और नियंत्रण प्रणालियां, रोबोटिक्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण होगा। इससे मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी। इसके लिए हाल ही राज्य सरकार ने राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 जारी की है। निवेशको को आकर्षित करने के लिए नीति में वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रोत्साहन और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास सहयोग तथा त्वरित सेवाओं के प्रावधान भी किए गए हैं।
वैश्विक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करना
राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 का प्रमुख उद्देश्य एयरोस्पेस और डिफेंस वैल्यू चेन में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, टेस्टिंग और सर्विसेज को प्रोत्साहन देते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करना है। यह नीति ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चर्स (ओइएम), सिस्टम इंटीग्रेटर्स, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और स्किलिंग इंस्टीट्यूशन्स को एयरोस्पेस एवं डिफेंस वैल्यू चेन में प्रोत्साहित करती है।
मैन्युफैक्चरिंग का हब बनेगा
प्रभावी औद्योगिक नीतियां और तेज आर्थिक विकास, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी, राष्टÑीय राजमार्गों का विशाल नेटवर्क, पर्याप्त भूमि की उपलब्धता के साथ-साथ विभिन्न धातुओं की सुलभता प्रदेश को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का हब स्थापित करने में कारगर साबित होगी। स्टील, तांबे और पीतल की यूनिट्स का मेटल मशीनिंग सेक्टरगोला-बारूद और डिफेंस के पुर्जे बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
लार्ज, मेगा और अल्ट्रा मेगा श्रेणियों में स्थापित होगी परियोजना
इस नीति के अन्तर्गत विनिर्माण परियोजनाओं को न्यूनतम 50 करोड़ से 300 करोड़ तक अचल पूंजी निवेश करने पर लार्ज, 300 करोड़ से एक हजार करोड़ के निवेश पर मेगा और एक हजार करोड़ से अधिक के निवेश पर अल्ट्रा मेगा परियोजना की श्रेणी में रखा गया है। सेवा सेक्टर के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं लार्ज, 100 करोड़ से 250 करोड़ तक मेगा और 250 करोड़ से अधिक के निवेश वाली परियोजनाएं अल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखी गई हैं।
उद्योगों को ये मिलेगी छूट
उद्योगों को दीर्घकालिक राहत देने के लिए 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क से 100 प्रतिशत छूट, 7 वर्षों तक मंडी शुल्क अथवा बाजार शुल्क का 100 प्रतिशत पुनर्भरण, स्टाम्प शुल्क और रूपांतरण शुल्क के भुगतान में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण के प्रावधान किए गए हैं। ग्रीन इन्सेंटिव, स्किल एवं ट्रेनिंग इन्सेंटिव तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इन्सेंटिव जैसे प्रावधान नीति को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।

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