जनजातीय क्षेत्रों के विकास को मिलेगी रफ्तार, 196.39 करोड़ के वार्षिक प्रस्ताव मंजूर
अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरक मॉडल विकसित
जयपुर। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की समीक्षा बैठक में अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए आर्टिकल 275(1) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 196.39 करोड़ रुपए के वार्षिक प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया। बैठक में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि आर्टिकल 275(1) के अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उनके सकारात्मक परिणामों को प्रदर्शित करने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य योजनाओं की उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना और अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरक मॉडल विकसित करना है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के लिए फील्ड विजिट नियमित रूप से किए जाएं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर निरीक्षण से योजनाओं के प्रभाव का सही आकलन होगा और जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। बैठक में जनजातीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण कार्यों पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्राथमिकता वाले प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश भी दिए गए।

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