राजस्थान पुलिस की वेबसाइट हैक! डेटा में सेंध का दावा, 70 हजार लोगों का रिकॉर्ड बेचने की पेशकश
एफआईआर से लेकर ई-केवाईसी रिकॉर्ड तक शामिल होने की बात
जयपुर। राजस्थान पुलिस से जुड़ा संवेदनशील डेटा चोरी होने के कथित दावे ने साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ‘स्कार्लेटग्रुप’ (Scarlettgroup) नामक हैकर समूह ने डार्कनेट पर पुलिस से संबंधित डेटा हासिल करने और उसे बेचने की पेशकश की है। समूह के दावे के अनुसार, कथित डेटा में करीब 70 हजार पहचान रिकॉर्ड, 59,460 मोबाइल नंबर और अन्य संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश में साइबर कमांडो और पुलिस मुख्यालय की टीम जांच में जुटी है। वहीं, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के माध्यम से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
ब्रीचफोरम्स पर पोस्ट कर किया दावा
हैकर समूह ने ‘ब्रीचफोरम्स’ नामक ऑनलाइन मंच पर कथित डेटा सेंधमारी को लेकर पोस्ट साझा की है। इसमें राजस्थान पुलिस के डेटा तक पहुंच बनाने और उसे खरीदारों को उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। समूह ने कथित तौर पर करीब 7 जीबी डेटा होने की बात कही है। हालांकि, केवल हैकर समूह की पोस्ट के आधार पर डेटा की वास्तविकता या उसके स्रोत की पुष्टि नहीं की जा सकती।
एफआईआर से लेकर ई-केवाईसी रिकॉर्ड तक शामिल होने की बात
स्कार्लेटग्रुप के मुताबिक, उसके पास कथित रूप से प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR), इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (eKYC) रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों से जुड़ी जानकारी है। इसके अलावा, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के ईमेल से संबंधित डेटा होने का दावा भी किया गया है। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो संवेदनशील पुलिस रिकॉर्ड और नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
साइबर कमांडो और पुलिस मुख्यालय की टीम कर रही जांच
एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरा ने बताया कि स्कार्लेटग्रुप ने डार्कनेट के माध्यम से डेटा लीक होने का दावा किया है। समूह ने राजस्थान पुलिस से जुड़ी अन्य एजेंसी का डेटा चोरी होने की बात भी कही है। मामले में प्रदेश के साइबर कमांडो और पुलिस मुख्यालय की टीम जांच कर रही है। इसके साथ ही I4C के माध्यम से भी संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।

मेहरा के अनुसार, जांच के जरिए हैकर समूह की ओर से किए जा रहे दावों की वास्तविकता का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में डेटा चोरी हुई है या समूह ने केवल दावा किया है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित डेटा लीक की स्थिति और उसके संभावित दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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