बाघों की नगरी में रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक का आयोजन
7 कैटेगरी में अवार्ड वितरण, भारत के भविष्य को दी बाघ संरक्षण की सीख
जयपुर। बाघों की आबादी की जब भी बात आती है तो दुनिया की नजर भारत की तरफ मुड़ जाती है। भारत के मूल में जीव संरक्षण के संस्कार है यही कारण है कि दुनियाभर में बाघों की आबादी के 70 फीसदी बाघों को हम यहां सुरक्षित रख पाए है।
बाघों की दुनिया को सुंदर और सुरक्षित बनाने और इस मुहिम को उत्सव की तरह मनाने के उद्देश्य से आनंद भारद्वाज, नवरोज डी धोंडी और सुनील मंगल ने स्थापित संस्था लिव 4 फ्रीडम की ओर से आयोजित रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक के तीसरे संस्करण में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर विचार रखे। कार्यक्रम में 7 कैटेगिरी में अवार्ड दिए गए। इसी के साथ बाघ व पर्यावरण संरक्षण में बेहतरीन काम करने वाली शख्सियतों को सम्मानित किया गया।
विश्व प्रसिद्ध वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकर सुबैया नल्ला मुत्थु की फिल्माई डॉक्यूमेंट्री को देखकर सभी ने बाघों की जिंदगी को करीब से देखा। स्कूली बच्चों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पर्यावरण प्रेमियों ने टाइगर सफारी का लुत्फ भी उठाया।

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