अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक व दूरदर्शी: राजेन्द्र राठौड़
राजेन्द्र राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सराहा
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने अरावली की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने आदेश पर रोक लगाने और विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से 'अरावली डेवलपमेंट अथॉरिटी' के गठन का आग्रह किया, ताकि राजस्थान की इस जीवनरेखा को खनन माफिया से स्थायी सुरक्षा मिल सके।
जयपुर । राजस्थान विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने अरावली पर्वतमाला को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय को ऐतिहासिक और दूरदर्शी बताया है। राठौड़ ने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की नई परिभाषा तय करने के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए 20 नवंबर के अपने पूर्व आदेश पर रोक लगाकर एक्सपर्ट कमेटी के गठन का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राठौड़ ने कहा कि इस एक्सपर्ट कमेटी द्वारा मौजूदा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण कर सर्वोच्च न्यायालय को तथ्यपरक सुझाव दिए जाएंगे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को लेकर गलत अर्थ निकाले जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर अरावली पर्वतमाला में खनन पर रोक बरकरार रखते हुए अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी।
उन्होंने कहा कि इससे पहले केंद्र सरकार ने भी अरावली में अवैध खनन रोकने और इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकारों को अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए खनन पट्टे जारी नहीं करने के निर्देश दिए थे।
राठौड़ ने अरावली जैसे संवेदनशील विषय पर जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कई बार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि अरावली राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके एक-एक पत्थर की रक्षा की जाएगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राजस्थान की प्राकृतिक सुरक्षा दीवार और जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए अरावली डेवलपमेंट अथॉरिटी का गठन किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा राजस्थान सुनिश्चित किया जा सके।

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