बूढ़ी तीज की शाही सवारी राजसी वैभव के बीच नगर भ्रमण पर निकली, 175 लोक कलाकारों ने प्रस्तुतियों से बांधा समां
शाही लवाजमे से दिखा राजसी वैभव
जयपुर। बूढ़ी तीज की पारंपरिक शाही सवारी परकोटे में आस्था, लोकगीतों की धुन और राजसी वैभव के बीच नगर भ्रमण पर निकली तो हर कोई अपलक देखता ही रह गया।
देसी-विदेशी मेहमानों ने तीज माता की एक झलक को अपने कैमरे में कैद करनी भरसक कोशिश की। करीब 175 लोक कलाकारों ने कच्ची घोड़ी, कालबेलिया, चरी, घूमर, चंग-ढप, मांगणिया, गायन, भपंग, रावणहत्था, कठपुतली और बहुरूपिया जैसी लोक विधाओं की प्रस्तुतियां देकर शाही सवारी को नयनाभिराम बना दिया। तीज माता की पालकी शाही लवाजमे के साथ नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। सवारी छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार होते हुए तालकटोरा स्थित पौंड्रिक पार्क पहुंची। तीज की इस पारंपरिक सवारी ने जयपुर की उस सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा, जिसमें आस्था के साथ लोककला, संगीत, शौर्य और राजसी परंपराओं का संगम दिखाई दिया। इस बीच नन्हीं सिनाया के गजब के हुनर को देख हर किसी ने दांतों दले अंगली दबा ली। जानकारी के अनुसार केवल आठ साल की उम्र की उम्र में सिनाया का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।
गौरवी कुमारी, पद्मनाभ सिंह ने तीज माता की पूजा की : तीज के अवसर पर राजपरिवार की पूर्व सदस्य गौरवी कुमारी ने सिटी पैलेस में तीज माता की पारम्परिक पूजा-अर्चना की। सक बाद शाही सवारी लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट से गुजरी, जहां राजपरिवार के पूर्व सदस्य पद्मनाभ सिंह ने पूरे रीति-रिवाज के साथ तीज माता की पूजा-अर्चना की।
शाही लवाजमे से दिखा राजसी वैभव :
घोड़े और ऊंटों से सजे शाही लवाजमे ने सवारी की राजसी भव्यता को और बढ़ाया। शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी का प्रदर्शन कर राजस्थान की वीर परंपरा और महिला शक्ति का संदेश दिया। सवारी के मार्ग में महल-अटारियों, झरोखों और हवेलियों से तीज माता की पालकी देखने के लिए लोग उमड़े। छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों तथा तीज के लोकगीतों ने वातावरण को जीवंत बनाए रखा। इसके बाद शाही सवारी तालकटोरा स्थित पौंड्रिक पार्क पहुंची, जहां कला मेले और लोक प्रस्तुतियों ने उत्सव को आगे बढ़ाया।

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