दुनिया में जंग, जयपुर में संग : गुड़ियों के इस संसार में कोई देश दुश्मन नहीं, अमेरिका-ईरान में टकराव और भारत-तुर्की में कश्मीर पर मतभेद
जयपुर के डॉल्स म्यूजियम में इन देशों की संस्कृतियों के लिए एक ही छत के नीचे जगह
जयपुर। दुनिया के बडे-बडे देश एक-दूसरे पर मिसाइलें दाग रहे हैं, लेकिन जयपुर में गुड़ियों का एक छोटा-सा संसार है। जहां किसी के हाथ में बंदूक नहीं है। रूस और यूक्रेन युद्ध में उलझे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव से पश्चिम एशिया अशांत है। खाड़ी देशों के आसपास हमलों और असुरक्षा का दायरा बढ़ रहा है। उधर तुर्की और भारत के बीच कश्मीर को लेकर कूटनीतिक मतभेद रहे हैं। लेकिन जयपुर का डॉल्स म्यूजियम दुनिया को एक बिल्कुल अलग नक्शे पर प्रस्तुत करता है जहां देशों की पहचान उनके हथियारों से नहीं। उनकी वेशभूषाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक सौंदर्य से होती है।
भारत सहित अन्य देशों की गुड़िया प्रदर्शित :
जेएलएन मार्ग में राजकीय सेठ आनन्दीलाल पोद्दार बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय जयपुर स्थित इस गुड़ियाघर में पांच सौ से अधिक गुड़ियों के माध्यम से भारत सहित विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत प्रदर्शित होने की जानकारी मिलती है। यहां दुनिया अपनी राजनीतिक शक्तियों से नहीं, पारंपरिक पोशाकों, रंगों और शिल्प की भाषाओं से परिचित होती है। रूस की लोकपरंपराएं हों, ईरान का वस्त्र-सौंदर्य, अरब की विशिष्ट परिधान संस्कृति या तुर्की की ऐतिहासिक विरासत। इन सबका अपना स्वतंत्र सांस्कृतिक अस्तित्व है। जिसे देशों के राजनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं किया जा सकता। म्यूजियम में चीन, जापान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, थाईलैंड, फ्रांस, ग्रीस और श्रीलंका समेत कई देशों की झलक मिलती है।
यहां जोड़ने की संभावनाए बचाकर रखती हैं...
जयपुर का गुड़ियाघर भी इसी सांस्कृतिक अंतरराष्ट्रीयतावाद की छोटी-सी अभिव्यक्ति है। एक ऐसी दुनिया जहां राजनीतिक सीमाएं लोगों को विभाजित करती हैं। वहां लोकसंस्कृतियां उन्हें जोड़ने की संभावना बचाए रखती हैं। मनुष्य ने गुड़ियों को अपना रूप दियाए लेकिन गुड़ियां मनुष्यों से अधिक शांतिप्रिय संसार का रूपक बन गईं।

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