बेहतर बीज से बढ़ेगी सरसों की पैदावार, किसानों की कमाई में 12.9 प्रतिशत तक इजाफा
राजस्थान में 5 साल में घटी सरसों की उत्पादकता
जयपुर। सरसों की बुवाई का समय नजदीक आने के साथ ही किसानों के सामने बेहतर बीज के चयन और फसल की उत्पादकता बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण बीज, समय पर बुवाई और खेती की वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान न केवल सरसों की पैदावार बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी आमदनी में इजाफा कर सकते हैं। एफआईसीसीआई सीसीएस एनआईएएम की रिपोर्ट में राजस्थान और हरियाणा में सरसों की खेती की स्थिति का विश्लेषण करते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर उपज में सुधार को जरूरी बताया है।
राजस्थान में पांच साल में घटी उत्पादकता: भारत के सरसों क्षेत्र की क्षमता का दोहन, प्रौद्योगिकी, उत्पादकता और किसान समृद्धि शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल खेती का रकबा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में सरसों की औसत उपज 2021-22 में 1716 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में घटकर 1552 किलोग्राम रह गई।
हाइब्रिड बीज से किसानों को फायदा :
रिपोर्ट में राजस्थान के किसानों के अनुभव भी शामिल किए गए हैं। डूंगरी गांव के एक किसान ने बताया कि पिछले साल हाइब्रिड बीज अपनाने से उन्हें 8 से 10 क्विंटल अतिरिक्त उपज मिली। वहीं, कंवरपुरा के एक किसान को 40 बीघा में प्रति बीघा 80 किलो अतिरिक्त उत्पादन हुआ।
3 जिलों के 100 किसानों का सर्वे :
अलवर, श्रीगंगानगर और हरियाणा के रेवाड़ी जिले के 100 किसानों पर किए गए सर्वे में हाइब्रिड बीज अपनाने की दर अलग-अलग पाई गई। श्रीगंगानगर में यह लगभग 48 से 50 प्रतिशत, अलवर में 65 से 70 प्रतिशत और रेवाड़ी में 75 से 80 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार बेहतर तकनीक और खेती के तरीकों से किसानों की आमदनी औसतन 12.9 प्रतिशत बढ़ी, जबकि फसल का नुकसान 23 प्रतिशत घटा है।

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