जोधपुर में तैनात हुआ एएच-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर का फ्लीट, इन्हीं हेलिकॉप्टरों ने वेनेजुएला में बरपाया था कयामत
पश्चिमी सीमा पर अपाचे की तैनाती: पाक के खिलाफ बढ़ी ताकत
भारतीय वायुसेना ने पंजाब और राजस्थान सीमा पर घातक एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर तैनात किए हैं। अत्याधुनिक सेंसर और मारक क्षमता से लैस ये हेलिकॉप्टर दुश्मन की हर हरकत को नाकाम करने में सक्षम हैं।
नई दिल्ली। भारत पंजाब और राजस्थान से लगती पाकिस्तानी सीमा पर अपने एएच-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और सीएच-47 ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर तैनात कर रहा है। उल्लेखनीय है कि इन्हीं हेलिकॉप्टरों ने अभी वेनेजुएला की राजधानी काराकास में अपने सटीक हमलों से कयामत ही बरपा कर दी है। एएच-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर दुनिया के सबसे खतरनाक हेलिकॉप्टर माने जाते हैं। इन्हीं अपाचे के एडवांस वर्जन अमेरिका की ओर से भारत को भी मिले हैं, जिन्हें भारतीय वायुसेना पश्चिमी मोर्चे पर तैनात करने जा रही है।
इन अपाचे की काबिलियत को देखते हुए अमेरिकी सेना ने हाल ही में इसे बनाने वाली कंपनी बोइंग को 2030 तक एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर फ्लीट को बनाए रखने के लिए 2.7 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। बीते 16 दिसंबर को भारतीय सेना को भी अमेरिका से तीन एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का आखिरी बैच मिला, जिससे राजस्थान के जोधपुर में 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में छह यूनिट का बेड़ा पूरा हो गया। सर्विस में शामिल होने से पहले ये हेलीकॉप्टर गाजियाबाद के हिंडन एयर फोर्स स्टेशन पर उतरे थे।
पाकिस्तान के बरक्श निर्णायक ताकत मिली
सूत्रों ने बताया कि छह एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर जोधपुर में तैनात किए जाएंगे, जिससे पाकिस्तान की तरफ पश्चिमी सेक्टर में सेना की स्ट्राइक और जासूसी क्षमताएं काफी बढ़ जाएंगी। इस स्क्वाड्रन को पिछले साल मार्च में पश्चिमी मोर्चे पर आॅपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए खास तौर पर बनाया गया था। यह डिलीवरी इस साल जुलाई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद हुई है, जिसमें दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए चल रही और आने वाली पहलों की समीक्षा की थी। बातचीत के दौरानअमेरिका ने भारत को दो हफ्तों के भीतर तीन अपाचे हेलीकॉप्टरों का पहला बैच और बाकी तीन इस साल नवंबर तक देने का आश्वासन दिया था।
रेडीनेस, विश्वसनीयता और उपलब्धता पर केंद्रित
अमेरिकी सेना इस लॉन्ग-टर्म अपाचे सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए सस्टेनमेंट डिसिप्लिन लागू कर रही है, जो रेडीनेस, विश्वसनीयता और उपलब्धता पर केंद्रित है। यह कोशिश अमेरिकी सेना के सबसे जरूरी कॉम्बैट एविएशन प्लेटफॉर्म में से एक को सपोर्ट करती है। एएच-64 अपाचे एक ट्विन-इंजन, चार-ब्लेड वाला अटैक हेलीकॉप्टर है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसे हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशन्स के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें एक टैन्डम कॉकपिट होता है जो दोनों क्रू मेंबर्स को आजादी से उड़ने और हथियार चलाने की सुविधा देता है, जिससे बचने की संभावना और मिशन की मजबूती बेहतर होती है। बाद के अपाचे वेरिएंट, जैसे एएच-64 एपाचे और सीएच-64 में मेन रोटर के ऊपर लॉन्गबो फायर कंट्रोल रडार लगा होता है। यह रडार सभी मौसम में और युद्ध के मैदान में धुंध या रुकावटों के बावजूद टारगेट का पता लगाने, उन्हें पहचानने और उन पर हमला करने की सुविधा देता है। भारत के पास भी यही एडवांस वर्जन एएच-64 हेलिकॉप्टर हैं। इंटीग्रेटेड हेलमेट एंड डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम क्रू को सिर हिलाकर 30 एमएम एम230 चेन गन को कंट्रोल करने की सुविधा देता है।
दुनिया का सबसे एडवांस्ड मल्टी-रोल कॉम्बैट हेलिकॉप्टर
भारत को मिले एएच-64 अपाचे को दुनिया का सबसे एडवांस्ड मल्टी-रोल कॉम्बैट हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो अत्याधुनिक एवियोनिक्स, सेंसर और हथियार प्रणालियों से लैस है। ये सभी मौसम और इलाके की स्थितियों में काम करने में सक्षम है। इसके शामिल होने से पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना की हमला करने और दुश्मन को रोकने की क्षमताओं को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रक्षा प्रणालियों में रडार चेतावनी रिसीवर, लेजर चेतावनी प्रणाली, जैमिंग उपकरण और इन्फ्रारेड काउंटरमेजर शामिल हैं, जिनका मकसद मुश्किल माहौल में जीवित रहने में मदद करना है। एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अमेरिका से मिलने वाले अपाचे हेलीकॉप्टरों का कॉन्ट्रैक्ट फरवरी 2020 में 600 मिलियन डॉलर की डील के तहत किया गया था। तीन हेलीकॉप्टरों का पहला बैच इस साल की शुरूआत में डिलीवर किया गया था और आखिरी खेप के आने से आर्मी के डेडिकेटेड अपाचे स्क्वाड्रन का पूरी तरह से आॅपरेशनल होना पक्का हो जाएगा।

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