बजट स्वीकृत हुआ फिर भी नहीं मिले 14.55 करोड़, बजट को तरसा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, थमा विकास
400 लाख की लागत से बनने थे 22 एनक्लोज, अब तक नहीं बने
कोटा। शहर का अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क प्रदेश का सबसे बड़ा होने के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ रहा है। पार्क बने 5 साल बीत चुके हैं, इसके बावजूद पर्यटकों को न कैफेटेरिया मिला और न ही इंटरप्रिटेक्शन सेंटर की सौगात। वहीं, रियासतकालीन चिड़ियाघर में बंद एक दर्जन से अधिक वन्यजीवों को पार्क में शिफ्ट करने के लिए 22 एनक्लोजर भी नहीं बन पाए।
हालात यह हैं, मुख्यमंत्री बजट घोषणा वर्ष 2025-26 में मास्टर प्लान के तहत सैकंड फेस के निर्माण के लिए करोड़ों का बजट दिए जाने की घोषणा हुई थी। इसके बाद जून 2026 में वित्त विभाग ने 14.55 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किए जाने की हरी झंडी दे दी। इसके बाद वन्यजीव विभाग द्वारा 10 जून 2026 को बायोलॉजिकल पार्क में मास्टर प्लान के अनुरूप क्या-क्या विकास कार्य करवाए जाने हैं, इसका प्रस्ताव भी भेज दिया। इसके बावजूद अब तक वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट को बजट नहीं मिला।
4 करोड़ से बनने हैं 22 एनक्लोजर
वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मास्टर प्लान के तहत बायोलॉजिकल पार्क में 35 प्रजातियों के एनिमल्स के लिए एनक्लोजर प्रस्तावित हैं। इनमें से शेष 22 एनक्लोजर का निर्माण 4 करोड़ रुपए की लागत से किया जाना है। एनक्लोजर बनने से चिड़ियाघर में बंद एक दर्जन से अधिक वन्यजीवों की बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्टिंग हो सकेगी।
5 साल बाद भी नहीं बन सका पशु चिकित्साल
पार्क में वेटनरी हॉस्पिटल प्रस्तावित है। जिसका निर्माण 1 करोड़ की लागत से किया जाना है। लेकिन, बजट के अभाव में 5 साल बाद भी पशु चिकित्सालय नहीं पाया। वर्तमान में जानवरों का इलाज उनके एनक्लोजर या नाइट शेल्टर में किया जाता है। वहीं, आवश्यक दवाइयां व उपकरणों की कमी से चिकित्सकों व कर्मचारियों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है।
80 लाख मिले तो बने कैफेटेरिया
विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में कैफेटेरिया के निर्माण में 80 लाख रुपए की लागत बताई गई है। पार्क के प्रथम फेज के निर्माण के दौरान ही यहां कैफेटेरिया बनाया जाना था, जो बजट के अभाव में अब तक नहीं बन पाया। पर्यटकों को अल्पहार के लिए भटकना पड़ता है।
1 करोड़ का आर्टिफिशल जंगल का इंजतार
बायोलॉजिकल पार्क के पास करीब 1400 स्क्वायर मीटर में 1 करोड़ की लागत से इंटरप्रिटेक्शन सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है। जिसमें टाइगर, लॉयन, पैंथर, भालू, सियार, भेड़िए, मगरमच्छ व घड़ियाल की सजीव डमी बनवाई जाएगी। जिनके नीचे प्रत्येक वन्यजीवों का वैज्ञानिक नाम, जीवनकाल, दिनचर्या, प्रजनन, खानपान आवास व जीवनचक्र की जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी।
7 एकड़ में बनना है स्टाफ क्वार्टर व प्रशासनिक भवन
बायोलॉजिकल पार्क में स्टाफ क्वार्ट्स व प्रशासनिक ब्लॉक सहित अन्य विकास कार्यों पर 240 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। प्रशासनिक भवन, पार्क के सामने स्थित 7 एकड़ वनभूमि पर बनाया जाएगा। जिसमें रेंज, एसीएफ व वन्यजीव चिकित्सक आॅफिस, बैरक सहित अन्य निर्माण कार्य किए जाने है। इसके अलावा इसी भूमि पर स्टाफ क्वार्ट्स बनाई जाएगी।
यह सुविधाएं भी होंगी विकसित
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) के मानकों के अनुरूप लेपर्ड फ्रूफ पार्क, विद्युत कार्य, सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर और वायरलेस सिस्टम, इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, पर्यटकों के लिए सुविधाएं, ग्रीन बेल्ट और लैंडस्केपिंग जैसे कई कार्य किए जाने प्रस्तावित हैं। बजट के अभाव में सभी कार्य रुके हैं।
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत विकास कार्य करवाए जाने हैं। वित्त विभाग से अभी तक 14.55 करोड़ रुपए का बजट नहीं मिला है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजे गए हैं। बजट मिलने पर मास्टर प्लान के तहत शेष बचे 22 नए एनक्लोजर सहित कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
-परमानंद गोचर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा

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