लग्जरी कारों में फ्यूल वायरस, महंगे इंजन पार्ट्स डेमेज, वाहन मालिकों पर लाखों की मार
मिलावटी पेट्रोल से लग्जरी कारों के डेमेज हो रहे महंगे इंजन पार्ट्स
कोटा। शहर में लग्जरी कारों के कैटेलिक कंवटर्ड सहित इंजन के महंगे पार्ट्स अचानक डेमेज हो रहे हैं। गारंटी पीरियड में होने के बावजूद कार मालिकों को न तो रिप्लेसमेंट मिल रहा न इंश्योरेंस क्लेम। डमेज उपकरणों को बदलवाने का लाखों का खर्चा कार मालिकों को खुद भुगतना पड़ रहा है।
शोरूम संचालक, वर्कशॉप सर्विस मैनेजर और आॅटो मोबाइल इंडस्ट्री से जुड़े टेक्निशियन मिलावटी पेट्रोल को इसकी वजह बता रहे हैं, जबकि, पेट्रोल पम्प संचालक मैन्यूफेक्चरिंग डिफेक्ट बताकर पल्ला झाड़ रहे। दोनों इंडस्ट्री में छिड़ी बहस के बीच उपभोक्ता शारीरिक, मानसिक व आर्थिक नुकसान से टॉर्चर हो रहा है। ऐसे में अब सवाल उठता है कि इंश्योरेंस कराने के बावजूद कम्पनियां फ्यूल कंटामिनेशन से डेमेज हुए कैटेलिक कंवटर्ड सहित इंजन पार्ट्स को इंश्योर्ड क्यों नहीं करती। हालात यह हैं, वर्कशॉपों पर प्रतिदिन दो से चार मामले इसी तरह के आ रहे हैं।
इधर, आॅटो मोबाइल से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है, इंश्योरेंस कम्पनियों ने समय-समय पर पॉलिसी में बदलाव कर वाहनों के टायर और प्लास्टिक को क्लेम में शामिल किया है, उसी तरह ई-20 पेट्रोल के बढ़ते चलन को देखते हुए प्यूल कंटामिनेशन (कचरे वाला पेट्रोल) से खराब हुए इंजन के महंगे पार्ट्स के नुकसान को भी कवर्ड किया जाना चाहिए।
कार मालिकों को लग रही 2.50 लाख रुपए तक की चपत
वर्ष 2024 के बाद आने वाली बीएस श्रेणी की लग्जरी कारों के कैटेलिक कंवटर्ड डेमेज होने के मामले वर्कशॉप पर लगातार रिपोर्ट हो रहे हैं। उपभोक्ताओं को मिलावटी पेट्रोल का हवाला देकर खराब हुए इंजन पार्ट्स का न तो रिप्लेसमेंट दिया जा रहा और न ही महंगे पार्ट्स खराब होने की प्रमाणिक वजह बता पा रहे। ऐसे में कार मालिक को 2 से 2.50 लाख रुपए तक की चपत लग रही है। उपभोक्ताओं ने मिलावटी पेट्रोल से डेमेज हुए इंजन पार्ट्स को इंश्योरेंस क्लेम में शामिल करने की मांग की है।
उपभोक्ताओं का सवाल-फर्स्ट व थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, फिर क्यों भुगते नुकसान
पीड़ित उपभोक्ताओं का कहना है कि 20 लाख से ज्यादा कीमत की कार है। खरीदते वक्त फर्स्ट व थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाया। इसके बावजूद कैटेलिक कंवटर्ड के नुकसान की भरपाई नहीं की जा रही। जबकि, यह इंजन का महत्वपूर्ण पार्ट होने के साथ सबसे महंगा है। इसके साथ स्पार्क पलर्ग पार्ट्स, फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पम्प और आॅक्सीजन सेंसर जुड़े होते हैं, जो सभी एक साथ खराब हो गए। इन सबका खर्चा 2 से 2.50 लाख रुपए है। इतने महंगे पार्ट्स को इंश्योरेंस में शामिल न करना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला
कारों में इस तरह की समस्या पेट्रोल के साथ कचरा आने के कारण आ रही है। ऐसा पेट्रोल डलने से कैटेलिक कंवटर्ड, स्पार्क प्लग पार्ट्स, फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पम्प, आॅक्सीजन सेंसर सहित इंजन से जुड़े यह पार्ट्स खराब हो जाते हैं।
-कौशल बंसल, किआ शोरूम संचालक
वर्ष 2021 के बाद की गाड़ियों में जरूर इस तरह की समस्या आना संज्ञान में आया था। फिलहाल अभी तो कैटेलिक कंवटर्ड डेमेज होने के मामले आने की जानकारी नहीं है। मिलावटी पेट्रोल कारण हो सकता है।
-मनीष कुमार, सेल्स मैनेजर हुंडई शोरूम
हमारे स्तर का मामला नहीं है। यह जनरल इंश्योरेंस काउंसलिंग व इंश्योरेंस रेगुलेटरी डवलपमेंट आॅथोरिटी के स्तर का है। कम्पनी केवल एक्सीडेंटल डेमेज पर ही इंश्योरेंस करती है। कार आउटलेट व वर्कशॉप के माध्यम से इस संबंध में जीआईसी तक फीडबैक भेजना चाहिए।
-देवेंद्र सिंह बैंसला, वरिष्ठ मंडलीय प्रबंधक, नेशनल इंश्योरेंस

Comment List