चार दिन में दो घटनाओं से अभिभावकों में दहशत : स्कूल से कॉलेज तक असुरक्षित बच्चे, सवालों के कठघरे में सुरक्षा इंतजाम
सिर मे लगे टांके, दोनों शिक्षण संस्थाों में हमले से बेखबर रहे जिम्मेदार
कोटा। घर के बाद स्कूल और कॉलेज को बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान मानकर अभिभावक उन्हें पढ़ने भेजते हैं, लेकिन कोटा में चार दिन के भीतर शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों पर हमले की दो घटनाओं ने इस भरोसे को झकझोर दिया है। पहले राजकीय महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम वोकेशनल स्कूल में कक्षा-दो के छात्र पर ब्लेड से हमला हुआ और अब राजकीय महाविद्यालय में प्रथम वर्ष के 17 वर्षीय छात्र के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। हमले में छात्र के सिर और होंठ से खून बहने लगा। सहपाठी उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसके सिर में टांके लगाए। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चार दिन में दूसरी घटना, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
स्कूल में छोटे बच्चे पर हमले के बाद कॉलेज में छात्र के घायल होने की घटना ने परिसर में निगरानी, विवाद की स्थिति में त्वरित हस्तक्षेप और सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो सुरक्षा के दावों की हकीकत क्या है? विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए केवल औपचारिक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनकी नियमित समीक्षा और प्रभावी निगरानी भी जरूरी है।
संभाग के बड़े कॉलेज में सुरक्षा गार्डों की कमी
विद्यार्थियों के अनुसार, गवर्नमेंट आर्ट्स और साइंस कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि कॉलेजों में केवल एक सुरक्षा गार्ड होने से पूरे परिसर पर निगरानी रखना मुश्किल हो सकता है। विद्यार्थियों ने सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने और नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसी विवाद की स्थिति में समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।
आईडी कार्ड जांच के बाद ही मिले प्रवेश
विद्यार्थियों ने कॉलेज के प्रवेश द्वार पर पहचान-पत्र की जांच अनिवार्य करने और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर नियंत्रण लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा के दौरान वाहनों में रखे सामान की चोरी की शिकायतें भी सामने आती हैं। इन समस्याओं को लेकर प्रशासन को पूर्व में ज्ञापन दिए जाने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होने का आरोप है।
अभिभावक बोले, जवाबदेही तय करे सरकार
अभिभावकों का मानना है कि बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना संस्थानों और सरकार की जिम्मेदारी है। परिसर में मारपीट की घटनाएं विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों में भी चिंता पैदा करती हैं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
विद्यार्थियों ने उठाई सुरक्षा की मांग
कॉलेजों में पहचान-पत्र की जांच, पर्याप्त सुरक्षा गार्ड और पुलिस गश्त जरूरी है। इन समस्याओं को लेकर प्रशासन को ज्ञापन दिया जा चुका है। आईडी कार्ड जांच के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया जाना चाहिए।
-रिद्धम शर्मा, जिलाध्यक्ष, एनएसयूआई देहात कोटा
बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने, पुलिस जाब्ता तैनात करने और सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन किए जा चुके हैं। व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता है।
-निखिल सैनी, एबीवीपी
कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था प्राचार्य के अधिकार क्षेत्र में आती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई और खेलकूद के साथ आपसी समन्वय बनाए रखना चाहिए और जागरूक रहना चाहिए।
-डॉ. नवीन मित्तल,क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय, कोटा

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