असर खबर का : फसलें नहीं रहेंगी प्यासी, रोटेशन से मिलेगा नहरी पानी
दायीं व बायीं नहर में बढ़ाया जलप्रवाह, होने लगी मॉनिटरिंग
कोटा। रबी फसलों की बुवाई का समय नजदीक आने के साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए सीएडी विभाग ने नहरों और माइनरों में जलप्रवाह का रोटेशन सिस्टम लागू किया है। इसके तहत निर्धारित समय-सारणी के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में पानी छोड़ा जाएगा, ताकि नहरों के अंतिम छोर यानी टेल तक बैठे किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी मिल सके। रबी सीजन की फसलों में सिंचाई के लिए पानी की डिमांड होने लगी है। वहीं गेहंू की बुवाई भी गति पकड़ने लगी है। इस कारण खेतों में नहरी पानी की डिमांड होने लगी है। ऐसे में कोटा बैराज की दायीं नहर में 5700 क्यूसेक और बायीं नहर में 1500 क्यूसेक जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके अलावा विभागीय अधिकारी टेल क्षेत्र तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुट गए हैं, ताकि रबी फसलों विशेषकर सरसों, चने व गेहूं को समय पर सिंचाई की सुविधा मिल सके।
तीन चरणों में होगा पानी का वितरण
विभाग के अनुसार नहरी पानी का वितरण तीन चरणों में किया जाएगा। इसके तहत अलग-अलग माइनरों और वितरिकाओं में पानी छोड़ने तथा बंद रखने की तिथियां निर्धारित की गई हैं। डाबर सेक्शन के धोरे, चिसा, कचनावदा, सारोला, खेड़ली घाटा और रीछड़ी माइनर में 1 से 14 नवंबर तक पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद 15 नवंबर से 1 दिसंबर तक जलप्रवाह बंद रहेगा। सुल्तानपुर सेक्शन के गुरेला, सुल्तानपुर, रामपुरिया, नयागांव, शाहपुरा, धनवा, नौताड़ा, जहांगीरपुरा और खेड़ली तरण माइनर में भी 1 से 14 नवंबर तक पानी मिलेगा। इसके बाद 15 नवंबर से 1 दिसंबर तक पानी बंद रहेगा।वहीं डाबरली, खेड़ा भोपाला, चौपड़खेड़ी, मंडावरा, पीपल्दा सांड, झाड़गांव, रामनगर और नरपतखेड़ी माइनर में 15 से 24 नवंबर तक पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद 25 नवंबर से 17 दिसंबर तक जलप्रवाह बंद रहेगा। लखसनीजा माइनर, टेल माइनर और सुल्तानपुर सब ब्रांच से झाड़गांव के आगे के क्षेत्रों में 25 नवंबर से 1 दिसंबर तक पानी मिलेगा। इसके बाद 2 से 30 दिसंबर तक जलप्रवाह बंद रहेगा।
वितरिकाओं की करवाई सफाई
रबी फसलों में सिंचाई के लिए पानी की मांग तेज हो गई है। इस समय गेहूं की फसल को पानी की ज्यादा जरूरत है। इसके लिए सीएडी विभाग की ओर से दायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके बावजूद टेल क्षेत्र में स्थित कई खेतों में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी नहीं पहुंच पा रहा था। गत दिनों सीएडी के अधिकारियों ने वितरिकाओं में आ रहे अवरोधों को हटा दिया है। वहीं क्षतिग्रस्त हो रही दीवारों की भी मरम्मत करवा दी है। इसके बाद नहर में जलप्रवाह की मात्रा को बढ़ा दिया है। अब सीएडी के अधिकारियों ने मौके पर जाकर जलप्रवाह की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीमें माइनरों और वितरिकाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, ताकि बीच रास्ते में कहीं भी रिसाव, अवरोध या अघोषित कटान की स्थिति न बने।
नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला
जर्जर वितरिकाओं के कारण जलप्रवाह में आ रही बाधा के सम्बंध में 25 अक्टूबर को दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि फसलों के लिए संजीवनी का काम करने वाली वितरिकाओं का झाड़-झंखाड़ गला घोंट रहे हैं। कचरे से अटी होने के कारण सभी खेतों पर तय समय में नहरी पानी पहुंचने में संशय बना हुआ है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद सीएडी विभाग ने वितरिकाओं की साफ-सफाई करवाई और पानी वितरण के लिए रोटेशन प्रणाली को लागू कर दिया है, ताकि सभी किसानों को समय पर पानी मिल सके।
किसानों को समान रूप से पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रोटेशन निर्धारित किया गया है। नहरों और माइनरों में तय कार्यक्रम के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है ताकि फसलों की बुवाई और सिंचाई के लिए समय पर पानी मिल सके। वितरिकाओं की भी सफाई करवाई गई है।
-महावीर कुमार, सहायक अभियंता, सीएडी विभाग

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