पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनवाएं, दस्तावेज भी रखें
सोने-चांदी में निवेश हमेशा सुरक्षित ,सोना महिलाओं को देता है आर्थिक मजबूती, अलग-अलग जगह करें निवेश
एमसीएक्स व सट्टा बाजार ला रहा अस्थिरता,सोच समझ कर करें निवेश, अस्थिर मार्केट में धैर्य बनाए रखें
कोटा। दे श में जिस तरह से पिछले कुछ समय से सोने-चांदी के भाव में तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है और पूरा बाजार अस्थिर बना हुआ है। उससे एक मध्यमवर्गीय परिवार से लेकर निवेशक तक के मन में सोने-चांदी की खरीद को लेकर शंका का भाव बना हुआ है। इस संबंध में मंगलवार को दैनिक नवज्योति कार्यालय में टॉक शो का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के सरार्फा,निवेशक, सलाहकार व अर्थशास्त्रियों से लेकर महिलाओं तक ने अपने विचार व्यक्त किए। जिनमें यही निष्कर्ष निकला कि बाजार जब स्थिर हो तभी सोने-चांदी में निवेश करें, जिससे लाभ होगा ही होगा। सोने-चांदी में निवेश सुरक्षित है। यह भविष्य के लिए लाभकारी है। टॉक शो में बरसों से सोने-चांदी का व्यापार करने वाले सरार्फा व्यापारियों ने अपनी-अपनी राय व्यक्त की। सभी का कहना था कि सोने-चांदी के भाव में जल्दी उतार-चढ़ाव होना अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर पर निर्भर है। वहीं पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनवाकर रखें और जितना भी सोना-चांदी खरींदें उसके बिल या दस्तावेज भी होना आवश्यक है।
हड़बड़ी में निवेश करना गलत
अंतरराष्ट्रीय बाजार डॉलर पर निर्भर है। जब सोने-चांदी में निवेश करना हो तो सोच-समझकर व जानकारी लेकर ही करना चाहिए। फिलहाल ईटीएप अच्छा विकल्प है। लोगों को छदम डिमांड के प्रति अवेयर रहना चाहिए। दूसरा जो कर रहा है उसके पीछे नहीं दौड़ना चाहिए। हड़बडी में निवेश करने से कई बार निर्णय गलत भी हो सकता है। सोने में निवेश करना वैसे तो सुरक्षित है लेकिन यह निवेश तभी करें जब बाजार स्थिर हो या पिछले पांच साल में सबसे न्यूनतम स्तर पर रहा हो। भाव जिस तेजी से बढ़ते हैं उसी तेजी से कम भी होते हैं। ऐसे में कई लोग भाव बढने पर सोना-चांदी बेचने लगते हैं और भाव गिरने पर खरीदने लगते हैं।
-पंकज लड्ढ़ा, कंसलटेंट एवं इनवेस्टमेंट गुरु
एमसीएक्स अस्थिरता का कारण
यदि बात की जाए तो एमसीएक्स दिन के साथ -साथ रातभर भी चलता हैं। वहीं जब तक सट्टा बाजार बंद नहीं हो जाता हैं तब तक यहीं शायद इसी तरह की स्थिति रह सकती हैं। सट्टा बाजार में कुछ पैसे लगाकर भी लोग सोना चांदी खरीद लेते हैं। जिससे भाव बढ़ते चढ़ते रहते हैं। यह बड़े निवेशकों का खेल है। अस्थिर बाजार में फिजिकल सोना चांदी तो होता नहीं है। पहले पचास सौ रूपए भी भाव में उतार चढ़ाव होता था तो लगता था यह क्या है। लेकिन अब विश्व व्यापी स्तर पर बड़े खिलाड़ी ऐसा करवाते हैं। सोने-चांदी के दामों में वृद्धि होने के कारण बाजार में इनकी डिमांड में कमी आई है।
-रमेश कुमार सोनी, अध्यक्ष स्वर्ण रजत कला उत्थान समिति
सोच-समझकर ही करें निवेश
जिस तरह से कोई भी नया काम करने से पहले उसके बारे में जानकारी ली जाती है। उसी तरह से सोने-चांदी में निवेश करते समय पूरी जानकारी व सलाह के बाद ही निवेश करना चाहिए। सेंटीमेंट के आधार पर निवेश करना सही नहीं है। निवेश एक जगह पर नहीं विविधता में करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह का माहौल बना हुआ है उसमें तेल और कैश जिसके पास है वही जीत में है। सोने-चांदी का भविष्य सुरक्षित है। लेकिन इसमें तभी निवेश करें जब बाजार स्थिर हो। बाजार में अस्थिरता कुछ समय के लिए है। इसका कारण डॉलर व अंतरराष्ट्रीय बाजार है। -प्रोफेसर गोपाल सिंह, अर्थशास्त्री
बाजार अस्थिरता के मुख्य कारण
1.वैश्विक प्रभाव का सीधा असर
2. रुपये की कमजोरी
3. त्योहार और शादी सीजन की मांग
4. ऊंचे भाव के कारण मांग में गिरावट
5. स्थानीय बाजार में खरीद क्षमता कम होना
6.सट्टेबाजी और एमसीएक्स ट्रेडिंग
7.चांदी की औद्योगिक मांग
8.ग्राहकों का इंतजार (वेट एंड वाच ट्रेंड)
सही जानकारी का अभाव
देश दुनिया में जिस तरह से सोने-चांदी के भाव में तेजी से बदलाव हो रहा है। उससे अधिकतर युवाओं के मन में आशंका बनी हुई है। युवा अधिकतर सोशल मीडिया पर चलने वाली खबरों से प्रभावित हो रहा है। जबकि सही जानकारी का अभाव होने से गलत समय पर निवेश होना खतरनाक हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है। उससे करीब 90 फीसदी लोगों को समझ ही नहीं आ रहा कि वे क्या करें। निवशकों के लिए हालात खराब हैं। स्थिरता का इन्तजार करें।
-नुपुर खंडेलवाल, सीएस
आम आदमी की रेंज से हो रहा बाहर
मैं करीब नौ साल से सोने-चांदी की दुकान का संचालन करती हूं। अभी इनके भाव बढ़ने के कारण मार्केट में लोअप मिडिल और लोअर क्लास की ग्राहकी पर काफी असर पड़ा हैं। अब खरीद के लिए लोग कम आते हैं। इनके भाव स्थिर रहें तो ग्राहक का लेने का मन करता हैं। वहीं मैं ग्राहकों को यही कहना चाहूंगी कि वे जब भी ज्वैलरी खरीदे हमेशा हॉलमार्क वाली ही खरीदें । जिससे फ्रॉड होने की संभावना नहीं रहती हैं। आप जब भी उसे निकालेंगे उस पर बाजार भाव का पैसा मिलेगा।
-मधुबाला माहेश्वरी, ज्वैलरी व्यापारी सिल्वर पैलेस
हड़बड़ी में न तो खरीदें और न ही बेचें
सोने-चांदी के भाव में जिस तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है उससे बाजार में अस्थिरता बनी है। लेकिन यह लेकिन यह अधिक समय तक नहीं रहेगी। फिर भी सोने-चांदी में निवेश करने से पहले व्यक्ति हो या निवेशक उसे अपनी हैसियत देखकर ही निवेश करना चाहिए। एक बार निवेश करने के बाद इसमें धैर्य रखने की जरूरत होती है। हड़बड़ी में न तो खरीदें और न ही बेचें। सोने-चांदी का भविष्य सुनहरा है। इसमें निवेश भी सुरक्षित है। लेकिन पूरी जानकारी लेने के बाद और सही समय पर ही निवेश करें।
-सुरेन्द्र गोयल विचित्र, अध्यक्ष सरार्फा बोर्ड
पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनाएं
सोना-चांदी सबसे सुरक्षित धन के रूप में माना जाता है। घर में महिलाएं आर्थिक सुरक्षपर विवाहित महिला 500 ग्राम तक, अविवाहित महिला 250 ग्राम तक और पुरुष 100 ग्राम तक सोना-चांदी रख रखता है। लेकिन इनका पक्का बिल होना चाहिए। वहीं जिन लोगों को विरासत में या पुश्तैनी सोना व जेवरात मिलते हैं उनकी वसीयत जरूर होनी चाहिए। जिससे वे किसी भी मुसीबत में नहीं पड़ सकेंगे। जेवरात की वसीयत सादा कागज पर भी बनाई जा सकती है। इसके लिए नोटरी की आवश्यकता नहीं होती।
-नरेन्द्र डाबी, कानूनी सलाहकार
कमोडिटी पर लगे लगाम
भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही सोने- चांदी खरीदने का चलन रहा हैं। अस्थिरता और उतार चढ़ाव ने लोगों के जीवन पर काफी प्रभाव डाला है। भाव नियंत्रण पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। क्योकि कमोडिटी में एक लाख लगाकर इंसान एक किलो सोना खरीद सकता हैं। यह गलत है। जिसके चलते कमोडिटी पर लगाम होना चाहिए जिससे इनके भावों में वृद्धि को रोका जा सकता हैं और जिससे ग्राहकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा हैं।
-मनीष कुमार मूंदड़ा , एक्सपोर्टर, राधा माधव आॅरनामेन्ट
बड़े खिलाड़ी ला रहे अस्थिरता
आप देख सकते हैं। जब से सोने -चांदी में वायदा की लेन-देन एमसीएक्स में आया तब से इनमें अस्थिरता रहने लगी। पहले हम देखते थे कि जब आॅफ सीजन होता था तब भाव कम होते थे और सीजन में बढ़ जाते थे। पर अब ऐसा नहीं होता हैं। पहले चुनावी साल में अधिकतर इन धातुओं के भाव बढ़ जाते थे। पर अब कुछ नहीं कह सकते हैं। सन 1965 के आसपास सिल्वर व 1974 में सोना की वायदा बाजार में ी एंट्री हुई। सन 2005 में इंडिया में एमसीएक्स की एंट्री हुई। 1980 से 2002 तक इंडिया की करैंसी में डिफे्ररेंट रहा। वहीं अभी करीब चाइना और इंडिया ही इनका सबसे बड़ा बाजार हैं।
-सीताराम सोनी, पूर्व अध्यक्ष स्वर्ण रजत कला उत्थान समिति
सोने में निवेश सुरक्षित है
सोने में निवेश करना सुरक्षित है। लेकिन यह सोच समझकर ही करना चाहिए। अपनी जमा पूंजी या एफडी तोड़कर सोने में निवेश करना गलत है। जिस तरह से बाजार में स्थिति बनी हुई है यह वायदा बाजार के कारण है। सोना -चांदी सही समय पर ही खरीदना चाहिए जब बाजार स्थिर हो। भाव में तेजी से उतार-चढ़ाव को अंजाम देने में एक लॉबी काम करती है। सोना हमेशा हॉल मार्क वाला ही खरीदना चाहिए। जिससे उसकी वैद्यता बनी रहती है।
-विवेक कुमार जैन, दिव्यांश हालमार्किंग
महंगाई बढने से कम हुई सोने की खरीद
सोने-चांदी के भावों में जिस तरह से तेजी हुई है। इससे महंगाई बढ़ी है। इस महंगाई के दौर में सोने-चांदी की खरीद कम हो गई है। हर परिवार में बेटी की शादी पर परिवार वाले उसे अपनी हैसियत के हिसाब से जेवरात देते हैं। महंगाई के इस दौर में सरकार को चाहिए कि बेटी की शादी में दिए जाने वाले जेवरात पर छूट का प्रावधान किया जाए। जैसे रजिस्ट्री में महिलाओं को छूट दी जाती है वैसा कुछ नियम बनाया जाना चाहिए। विशेष रूप से सोने-चांदी की खरीद पर जीएसटी में कमी हो।
-भारती मूंदड़ा, गृहिणी
विश्व स्तर पर काम कर रही लॉबी
सोने-चांदी के भाव में जिस तरह से तेजी से बदलाव हो रहा है। इसका कारण अधिकतर वायदा बाजार है। वर्तमान में इस क्षेत्र में जो उतार-चढ़ाव हो रहा है उसमें विश्व स्तर की लॉबी काम कर रही है। यह लॉबी 2024 से ही चल रही है। डॉलर के मुकाबले रूपया कमजोर हुआ है। सोने-चांदी का भाव डॉलर पर निर्भर करता है। एमसीए बाजार पर सरकार का नियंत्रण नहीं है।ऐसे में बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
-अरूण कुमार जैन, अध्यक्ष सरार्फा थोक विक्रेता व्यावसायिक संघ
महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित
सोना-चांदी महंगी होने के बाद भी थोड़ी-थोड़ी बचत करके ही इनको खरीद सकते हैं। वहीं कुछ मां -बाप की आर्थिक स्थिति सहीं है तो वहां थोड़ा-थोड़ा करके भी दे सकते हैं। और इसमें इनवेस्ट भी कर सकते हैं। भारत में महिलाओं को हर मां -बाप आर्थिक सुरक्षा के लिए स्त्री धन के रूप में अपनी बेटी को शादी में भारतीय परंपरा अनुसार जो जरूरी गहने होते हैं वह देते हैं। बाजार की उथल पुथल से इसमें कमी आ गई है। भाव बढ़ने से लोग खरीद करने से पहले सोचते हैं।
-आरती डाबी, समाज सेविका , न्याय विज्ञान संस्थान
युवा पीढ़ी का सोना -चांदी से मोह भंग
सोने चांदी के प्रति मोह में कमी आई है। अब लोग सोना चांदी केवल इनवेस्टमेंन्ट कोे लिए खरीदते और बेचते हैं। वहीं अब सोने-चांदी की रेट बढ़ जाती है। तब इनको बेचा जाता हैं। वहीं कई बार लगातार रेट कम होने से जनता को भ्रम पैदा हो जाता हैं। हमारे घर में बीते दिनों में इनकी खरीदारी की अब इनके भाव में कमी - बढ़ोतरी होने के हम कई बार सही निर्णय नहीं ले पाते हैं। युवा पीढ़ी सोना - चांदी नहीं खरीद रही। आज का युवा आर्टिफिशीयल ज्वैलरी की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
-दीप्ति मेवाड़ा, पे्रसिडेंट, जेडीबी कामर्स कॉलेज
हॉलमार्क की जागरूकता जरूरी
भाव बढ़ने के कारण अब ग्राहकी कम हो गई। अभी करीब हम सोने पर 20 और 22 कैरेट पर हॉलमार्क लगा रहे हैं। डायमंड पर करीब 14 कैरेट पर हॉलमार्क लगाया जाता हैं। हाल मार्क में छह डिजिट की लोगों को जानकारी नहीं होती है। इसकी जानकारी होना चाहिए। अक्सर लोग ज्वैलरी में में बारीक या छोटे नग लगाते है तो वह भी वजन में काउंट होते हैं जब कि पुराने सोने की स्थिति में उनहों गला कर लिया जाता है।
-योगेश सोनी, हॉलमार्क सेन्टर व्यापारी

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