कोटा के सरकारी महाविद्यालयों में न मैदान, न पीटीआई; कैसे चमकेंगे कोटा के खिलाड़ी ?
जर्जर मैदानों में अभ्यास को मजबूर छात्र
कोटा। कब तक बोझ संभाला जाए, द्वंद कहां तक पाला जाए,युद्ध कहां तक टाला जाए, तू भी है राणा का वंशज , फैंक जहां तक भाला जाए। कवि की यह लाइनें कोटा के खिलाड़ियों पर पूरी तरह लागू होती हैं। नेशनल लेवल तक छात्र-छात्राओं को प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता भी है तो खेल मैदान, प्रशिक्षक,सुविधाओं का अभाव उन्हें पीछे धकेल देता है। छात्र गेम्स की बारीकियां तो दूर सही तरीका भी नहीं सीख पाते। ऐसे में खिलाड़ी कैसे राज्य व नेशनल लेवल प्रतियोगिता के लिए तैयार होंगे। कोटा विश्वविद्यालय की ओर से हर साल अंतर महाविद्यालय व विश्वविद्यालय प्रातियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा अगस्त माह में स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी किया जाता है। लेकिन, हर साल कॉलेज विद्यार्थियों को स्पोर्ट्स ग्राउंड व प्रशिक्षक की कमी से जूझना पड़ता है।
स्पोर्ट्स कैलेंडर से पहले खेल सुविधाएं दें
राजकीय महाविद्यालय कोटा के छात्रों का कहना है कि कोटा विश्वविद्यालय द्वारा स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी करने से पहले कॉलेज प्रशासन को खेल सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए। मैदान में घास उगी हुई है और कई स्थानों पर पानी भरा होने से नियमित अभ्यास प्रभावित हो रहा है। कॉलेज प्रशासन को मैदान की सफाई, मरम्मत, जल निकासी और स्थायी पीटीआई की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि खिलाड़ी विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की बेहतर तैयारी कर महाविद्यालय का नाम रोशन कर सकें।
न तो पीटीआई है और न ही सामग्री
कोटा यूनिवर्सिटी का स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी होने वाला है, लेकिन राजकीय महाविद्यालय कोटा में खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। हमारे पास न तो पीटीआई है और न ही सामग्री। ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों को तैयारी करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज प्रशासन को व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए।
-चित्रांक्षा कंवर, छात्रा राजकीय महाविद्यालय कोटा
कॉलेज में नियमित शारीरिक शिक्षक नहीं है। हर साल अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब गेम्स आते हैं तो कॉलेज प्रशासन संविदा पर तीन से चार माह के लिए पीटीआई लगाते हैं और प्रतियोगिता की समाप्ती के बाद उन्हें हटा देते हैं। सालभर प्रशिक्षक नहीं होते। ऐसे में खिलाड़ियों की नियमित प्रेक्टिस नहीं हो पाती।
-आशीष मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजकीय महाविद्यालय कोटा
राजकीय महाविद्यालय कोटा के मैदान में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है, जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास में परेशानी होती है। मैदान की तत्काल सफाई और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
-हेमंत मीणा, छात्र राजकीय महाविद्यालय कोटा
राजकीय कला महाविद्यालय कोटा में पिछले कई सालों से शारीरिक शिक्षक का पद खाली पड़ा है। वहीं, कैम्पस में खेल मैदान भी नहीं है। लेकिन, पास में ही बरसों पुराना स्टेडियम है, जो केडीए के अधीन है। वर्तमान में उसमें जंगल उगा हुआ है। इसका जिर्णोद्धार के लिए केडीए को कई बार पत्र लिख महाविद्यालय को सौंपने की मांग की है लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। न तो गेम्स सिखाने वाला है और न ही खेलने के लिए मैदान है। खिलाड़ी प्रतियोगिता की तैयारी नहीं कर पाते।
-रिद्धम शर्मा, प्रदेश सचिव एनएसयूआई, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज
इनका कहना
सरकार हर जगह खेल मैदान व पीटीआई उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है। वैसे भी आरपीएससी के तहत शारीरिक शिक्षकों की भर्ती अंतिम चरण में है। जल्द ही सरकार के स्तर पर पीटीआई की महाविद्यालयों में पोस्टिंग हो सकेगी।
-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा
कोटा विश्वविद्यालय द्वारा अगस्त के प्रथम सप्ताह में स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी कर दिया जाएगा। जिसके तहत अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता का आगाज अगस्त के आखिरी सप्ताह से हो जाएगा। प्रतियोगिताएं जनवरी माह तक जारी रहेंगी। इनमें से चयनित छात्रों की टीमें अखिल भारतीय व पश्चिम क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय खेलों में भाग लेंगे। यह प्रतियोगिताएं देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित की जाती है।
- डॉ. विजय सिंह, सचिव स्पोर्ट्स बोर्ड एवं निदेशक शारीरिक शिक्षा

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