Voice of Youth : बकानी में छात्रा के स्कूल में बंद होने की घटना से उठे सवाल, हर कक्षा में लगे इमरजेंसी बेल

युवाओं ने कहा—बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

Voice of Youth : बकानी में छात्रा के स्कूल में बंद होने की घटना से उठे सवाल, हर कक्षा में लगे इमरजेंसी बेल
छुट्टी के बाद हर कक्षा, शौचालय और परिसर की हो अनिवार्य जांच, लापरवाही पर तय हो जवाबदेही।

कोटा। सरकारी हो या निजी विद्यालय, बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। स्कूल की छुट्टी के बाद किसी बच्चे का कक्षा-कक्ष, शौचालय या परिसर में छूट जाना गंभीर लापरवाही है। झालावाड़ के बकानी स्थित सरकारी विद्यालय में छात्रा के बंद होने के मामले ने एक बार फिर स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दैनिक नवज्योति के वॉयस ऑफ यूथ अभियान में युवाओं ने स्कूलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठाई। युवाओं का कहना है कि प्रत्येक कक्षा में इमरजेंसी बेल, विद्यालय में आपातकालीन फोन, सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही स्कूल बंद करने से पहले प्रत्येक कमरे, शौचालय और अन्य स्थानों की अनिवार्य रूप से जांच की जाए। बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार को स्पष्ट नीति बनाकर सभी विद्यालयों में उसका पालन सुनिश्चित करना चाहिए।

हर कमरा जांचने के बाद ही लगे ताला
विद्यालय बंद करने से पहले चपरासी और जिम्मेदार अधिकारी प्रत्येक कक्षा-कक्ष, शौचालय और अन्य स्थानों की स्वयं जांच करें। इसके बाद दोबारा घंटी बजाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई बच्चा अंदर न रह गया हो। क्लास टीचर की जिम्मेदारी हो कि वह बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाले। सीसीटीवी कैमरों का नियंत्रण प्रधानाचार्य के पास रहे और छुट्टी के बाद भी विशेषकर रात के समय उनकी निगरानी की जाए।
-गरिमा परिहार, कॉलेज स्टूडेंट

आसपास के लोग भी निभाएं जिम्मेदारी
प्रत्येक विद्यालय में 24 घंटे सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर गार्ड के रात्रि विश्राम के लिए कमरे की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है। स्कूल के आसपास रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहना चाहिए। यदि विद्यालय परिसर से रोने, चिल्लाने या किसी बच्चे के मदद मांगने की आवाज आए तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चे की मदद की जा सके।
-आकांक्षा कश्यप, कॉलेज स्टूडेंट

हर कक्षा में हो इमरजेंसी बेल और फोन
सरकारी हो या निजी, प्रत्येक विद्यालय की हर कक्षा में इमरजेंसी बेल लगाई जानी चाहिए। यदि कोई बच्चा या कर्मचारी अंदर छूट जाए तो बेल बजाकर आसपास के लोगों को सूचित कर सके। इसके साथ ही विद्यालय में आपातकालीन फोन और सभी संबंधित स्टाफ के संपर्क नंबर उपलब्ध होने चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता ली जा सके।
-कुनाल मीणा, कॉलेज स्टूडेंट

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लापरवाही पर तय हो जवाबदेही
यदि किसी विद्यालय में बच्चा बंद रह जाता है तो सबसे पहले जिम्मेदार व्यक्ति को नोटिस देकर जवाब मांगा जाना चाहिए। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। क्लास टीचर को स्कूल पहुंचते ही बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए और छुट्टी के समय भी सभी बच्चों के सुरक्षित बाहर निकलने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। छोटे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
-राहुल मेघवाल, कॉलेज स्टूडेंट

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