थमा प्रचार का शोर : अब घर-घर संपर्क, निर्दलीयों ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की धड़कन
80 वार्डों में प्रत्याशियों ने झोंकी ताकत
उदयपुर। नगर निगम चुनाव के लिए बुधवार शाम प्रचार का शोर थम गया। गत कई दिनों से 80 वार्डों में चल रही चुनावी गहमागहमी अब खामोशी में बदलने लगी है। हालांकि प्रत्याशी मतदान तक घर-घर जाकर व्यक्तिगत संपर्क कर मतदाताओं से समर्थन मांग सकेंगे। प्रचार के अंतिम दिन प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक मतदाताओं को साधने और वार्डों के समीकरण अपने पक्ष में करने का प्रयास किया।प्रचार अभियान के दौरान शहर में कहीं वाहन रैलियों ने माहौल बनाया तो कहीं छोटी-बड़ी सभाओं और नुक्कड़ बैठकों के जरिए मतदाताओं को पक्ष में करने की कोशिश हुई। भाजपा और कांग्रेस के साथ बीएपी तथा निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपने-अपने वार्डों में जोरदार जनसंपर्क किया। अंतिम दौर में बड़े नेताओं की मौजूदगी भी प्रत्याशियों के लिए अहम रही। नेताओं की सभाओं और रोड शो के जरिए कार्यकतार्ओं में जोश भरने के साथ मतदाताओं के बीच माहौल बनाने का प्रयास किया गया। बीएपी ने भी कई वार्डों में सक्रियता बढ़ाई। सांसद राजकुमार रोत ने पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में कई क्षेत्रों में पहुंचकर जनसंपर्क और सभाएं कीं।
दिग्गजों के वार्डों में निर्दलीयों ने बढ़ाई बेचैनी :
सबसे रोचक मुकाबला उन वार्डों में माना जा रहा है, जहां भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं से जुड़े प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। आधा दर्जन से अधिक वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की मजबूत सक्रियता ने दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है। संगठन स्तर पर भी इन क्षेत्रों में प्रचार और जनसंपर्क को गति दी गई। वहीं निर्दलीयों ने भी आखिरी समय तक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया। ऐसे में कई वार्डों में मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस से आगे बढ़कर त्रिकोणीय और बहुकोणीय बनता दिखाई दे रहा है।
अब प्रचार नहीं, बूथ मैनेजमेंट की बारी :
प्रचार खत्म होने के साथ ही राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों का फोकस अब बूथ मैनेजमेंट पर रहेगा। कार्यकतार्ओं और समर्थकों को मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी। कांटे के मुकाबले वाले वार्डों में एक-एक वोट निर्णायक माना जा रहा है। ऐसे में अगले चरण में प्रत्याशियों की असली परीक्षा बूथ स्तर की रणनीति और मतदान प्रतिशत बढ़ाने की क्षमता की होगी। फिलहाल 80 वार्डों में चुनावी शोर थम चुका है। अब नारे और रैलियां नहीं, बल्कि घर-घर संपर्क, व्यक्तिगत समीकरण और बूथ की रणनीति निर्णायक होगी।

Comment List