WHO की चेतावनी: कांगो-युगांडा में इबोला का आतंक, संक्रमण और मौतों ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

स्वास्थ्य कर्मियों समेत 695 संक्रमित

WHO की चेतावनी: कांगो-युगांडा में इबोला का आतंक, संक्रमण और मौतों ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का कहर जारी है, जहां अब तक 138 लोगों की मौत हो चुकी है और 695 मामले सामने आए हैं। डब्ल्यूएचओ ने कांगो में खतरे को 'बेहद उच्च' घोषित किया है। चमगादड़ों से फैलने वाली इस जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है।

जिनेवा। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा में बुंडिबुग्यो वायरस के कारण फैली इबोला बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। अभी तक इस जानलेवा वायरस से 138 लोगों की जान जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों में अब तक इस बीमारी से संक्रमित 695 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 138 लोगों की मौत हो चुकी है। कांगो में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहाँ संक्रमितों की संख्या बढ़कर 676 हो गई है और 136 लोगों की जान जा चुकी है। यहाँ मृत्यु दर 20.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। कांगो के इतुरी प्रांत में इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। राहत और बचाव कार्य में जुटे कम से कम 16 स्वास्थ्य कर्मी भी इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। कांगो में सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं और आबादी का लगातार पलायन इस बीमारी को नियंत्रित करने में बड़ी बाधा बन रहा है।

पड़ोसी देश युगांडा में अब तक इबोला के 19 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें से दो मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा एक संभावित मरीज की भी जान गई है। युगांडा में राहत की बात यह है कि पिछले छह दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। यहाँ के सभी मामले कांगो से आये संक्रमितों या उनके संपर्क में आये लोगों से जुड़े हैं और अभी तक स्थानीय स्तर पर आम जनता में इसके फैलने के संकेत नहीं मिले हैं।

बुंडिबुग्यो वायरस से होने वाली यह बीमारी इबोला का ही एक बेहद गंभीर रूप है। यह पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारी है, जिसके फैलने की शुरुआत चमगादड़ों या संक्रमित वन्यजीवों के संपर्क में आने से होती है। इसके बाद यह इंसानों के बीच खून या लार आदि के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। अभी तक इस वायरस के इलाज के लिए कोई स्वीकृत टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है।

डब्ल्यूएचओ ने कांगो में इस बीमारी के खतरे के स्तर को 'बेहद उच्च' और युगांडा सहित सीमा साझा करने वाले पड़ोसी देशों में 'उच्च' श्रेणी में रखा है। वैश्विक स्तर पर इसका खतरा फिलहाल कम आंका गया है। डब्ल्यूएचओ, अफ्रीका स्वास्थ्य नियंत्रण केंद्र और दोनों देशों के स्वास्थ्य मंत्रालय मिलकर इस महामारी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। इस संकट से निपटने के लिए कुछ संभावित दवाओं के चिकित्सीय परीक्षण (क्लिनिकल ट्रायल) की तैयारी भी की जा रही है। संगठन ने फिलहाल दोनों देशों के साथ यात्रा या व्यापार पर किसी भी तरह का प्रतिबंध न लगाने की सलाह दी है।

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