ईरान-अमेरिका तनाव फिर भड़का: अमेरिकी हमलों पर तेहरान का बड़ा आरोप, युद्धविराम उल्लंघन बताकर संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग

तटीय रडार ठिकानों पर अमेरिकी हमला

ईरान-अमेरिका तनाव फिर भड़का: अमेरिकी हमलों पर तेहरान का बड़ा आरोप, युद्धविराम उल्लंघन बताकर संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग
अमेरिकी सेना (सेंटकॉम) द्वारा ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप पर तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने IAEA पर भूमिका के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए तकनीकी रिपोर्टों को दबाव का साधन न बनाने की चेतावनी दी।

तेहरान। ईरान ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर अपनी भूमिका का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उसे तेहरान पर दबाव बनाने से बचने की सलाह दी। ईरान का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी बलों ने ईरान के गोरुक शहर और क़ेश्म द्वीप स्थित तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमला किया, जिससे मौजूदा युद्धविराम के बावजूद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि यदि आईएईए परमाणु विवाद के समाधान में कूटनीतिक भूमिका निभाना चाहता है तो उसे अपनी तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का उपकरण नहीं बनने देना चाहिए। यह टिप्पणी उस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद आई, जिसमें ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका की केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार उसकी सेनाओं ने होरमुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरान के चार एकतरफा हमलावर ड्रोन मार गिराए और इसके बाद गोरुक तथा क़ेश्म द्वीप के तटीय निगरानी रडार स्थलों पर हमले किए।

सेंटकॉम ने दावा किया कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा थे और रडार ठिकानों पर हमले आगे होने वाले हमलों को रोकने के लिए किये गये। ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "यदि एजेंसी कूटनीतिक समाधान का हिस्सा बनना चाहती है, तो उसे तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का साधन बनाने से बचना होगा।" उन्होंने आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने हाल में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों की निंदा नहीं की। उनके अनुसार एजेंसी एक ओर हमलों के प्रभावों पर रिपोर्ट जारी करे और दूसरी ओर हमलावरों पर चुप्पी साधे रखे, यह स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा, "एजेंसी हमलों के परिणामों की रिपोर्ट दे, ईरान से तकनीकी और राजनीतिक कीमत चुकाने की अपेक्षा करे और हमलावर के बारे में मौन रहे, यह उचित नहीं है।" ईरान ने तड़के हुए अमेरिकी ड्रोन हमलों को अप्रैल में हुए युद्धविराम का "स्पष्ट उल्लंघन" करार दिया और संयुक्त राष्ट्र से अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की। साथ ही उसने आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार को दोहराया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सिरिक क्षेत्र और क़ेश्म द्वीप स्थित रडार एवं तटीय निगरानी सुविधाओं पर हमला युद्धविराम का खुला उल्लंघन और देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ सैन्य आक्रमण है। मंत्रालय ने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया वे देश की सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम करते हैं।

बयान में कहा गया, "यह कार्रवाई इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी शासन के शत्रुतापूर्ण और उकसावेपूर्ण व्यवहार की निरंतरता है तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के प्रति अमेरिकी प्रशासन की पूर्ण अवहेलना को उजागर करती है।" ईरान ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए उसकी सशस्त्र सेनाओं ने अमेरिकी कार्रवाई का "अनुपातिक और प्रभावी" जवाब दिया और हमलावरों को अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होने दिया।

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विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन यह साबित करता है कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने या स्थिरता बहाल करने का इच्छुक नहीं है। बयान में कहा गया, "संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन एक बार फिर साबित करता है कि वह न तो तनाव कम करना चाहता है और न ही स्थिरता की दिशा में लौटना चाहता है, बल्कि अपनी उकसावेपूर्ण कार्रवाइयों से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।"

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ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं का उपयोग करेगा। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय देशों से भी अपील की कि वे अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत का पालन करें और अपनी भूमि या सुविधाओं का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई की योजना बनाने या उसे अंजाम देने के लिए न होने दें। बयान में कहा गया, "विदेश मंत्रालय क्षेत्रीय देशों से आग्रह करता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के उस मूल सिद्धांत का सम्मान करें जिसके तहत किसी भी देश को अपनी भूमि और सुविधाओं का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों के लिए नहीं करने देना चाहिये।"

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ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी अपील की कि वे अमेरिकी युद्धविराम उल्लंघनों पर तत्काल और प्रभावी प्रतिक्रिया दें तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन और क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को सामान्य बनने से रोकें।

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