अमेरिकी राजनयिकों का दावा: प्रमुख ताकत बनकर उभरे मुजतबा खामेनेई, जंग की रणनीति और राजनयिक वार्ता दोनों का कर रहे नेतृत्व

मुजतबा खामेनेई संभाल रहे ईरान की कमान

अमेरिकी राजनयिकों का दावा: प्रमुख ताकत बनकर उभरे मुजतबा खामेनेई, जंग की रणनीति और राजनयिक वार्ता दोनों का कर रहे नेतृत्व

हमले में घायल होने के बावजूद मुजतबा खामेनेई ईरान की युद्ध रणनीति और राजनयिक वार्ताओं का गुप्त रूप से नेतृत्व कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार से बचते हुए, वह हस्तलिखित नोटों के जरिए सरकार को निर्देशित कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अब भी अपनी मिसाइल क्षमताओं को पुनः संगठित करने में जुटा है।

वॉशिंगटन। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई संघर्ष के दौरान देश की युद्ध रणनीति को आकार देने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ राजनयिक बातचीत में शामिल अधिकारियों को निर्देशित करने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के पहले ही दिन उनके पिता और ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडर मारे गये थे। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के आकलन के अनुसार, उसी हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मुजतबा कथित तौर पर ईरान की युद्धकालीन रणनीति बनाने, सैन्य अभियानों का निर्देशन करने और अमेरिका से समझौते के राजनयिक प्रयासों का मार्गदर्शन करने में गहराई से लगे हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, मुजतबा के चेहरे, हाथ, धड़ और पैर काफी ज्यादा झुलस गये थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मानना है कि वह सार्वजनिक नजरों से दूर रहकर स्वस्थ होने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार से जानबूझकर बच रहे हैं और केवल व्यक्तिगत मुलाकातों या संदेशवाहकों के जरिये हस्तलिखित नोटों से ही संवाद कर रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने इस सप्ताह पुष्टि की कि उन्होंने मुजतबा के साथ ढाई घंटे तक आमने-सामने बैठक की। हमले के बाद नये सर्वोच्च नेता और ईरान के किसी वरिष्ठ अधिकारी के बीच यह पहली सार्वजनिक रूप से पुष्ट मुलाकात थी।

ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय में प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहिर हुसैनी ने शुक्रवार को कहा, "खामेनेई अपनी चोटों से उबर रहे हैं और अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, हुसैनी ने सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर चिंताओं को कम करने की कोशिश की और कहा कि खामेनेई के पैर और पीठ के निचले हिस्से में मामूली चोटें आयी थीं। उन्होंने यह भी बताया, "छर्रे का एक छोटा-सा टुकड़ा उनके कान के पीछे लगा था, लेकिन घाव अब भर रहे हैं।"

ईरान में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए हुसैनी ने कहा, "खुदा का शुक्र है कि वह स्वस्थ हैं। दुश्मन हर तरह की अफवाहें फैला रहा है और झूठे दावे कर रहा है। वे उन्हें देखना और ढूंढ़ना चाहते हैं, लेकिन लोगों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सही समय आने पर वह आपसे बात करेंगे।" अमेरिकी विश्लेषक स्वीकार करते हैं कि वे मुजतबा की मौजूदगी की पुष्टि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं कर सकते। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ईरान के सत्ता ढांचे के भीतर मौजूद अधिकारी अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उन तक अपनी पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।

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आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सहयोग से चलता प्रतीत होता है। गालिबाफ ने ही अमेरिका के साथ परमाणु और युद्धविराम वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई वह वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गयी थी और दूसरे दौर की प्रस्तावित बैठक कभी नहीं हो पायी। बाद में ट्रंप ने इस विफलता का कारण ईरान के नेतृत्व के भीतर गहरे आंतरिक मतभेदों को बताया।

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अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अनिश्चितता के बावजूद युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम जरूर किया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान के लगभग दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर अब भी चालू माने जा रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इसका आंशिक कारण वर्तमान में जारी युद्धविराम है, जिसने ईरान को संभलने और उन लॉन्चरों को बाहर निकालने का समय दे दिया है, जो पिछले हमलों के दौरान दब गये थे।

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रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के एक आकलन में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि ईरान भारी आर्थिक संकट का सामना करने से पहले अमेरिका के नेतृत्व वाली वर्तमान नाकेबंदी को अगले चार महीनों तक और झेल सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के शासन ढांचे को 'पूरी तरह से बिखरा' बताया है। वहीं ह्वाइट हाउस ने इस बात पर जोर दिया है कि सैन्य दबाव, आर्थिक अलगाव और आंतरिक कलह ने ईरानी शासन को काफी कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे भी आगे बढ़कर तर्क दिया है कि ईरान में प्रभावी रूप से सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वर्तमान वार्ताकार पहले वालों की तुलना में अधिक 'समझदार' हैं।

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