प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों पर डाक विभाग जारी करेगा स्पेशल कवर

प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों पर डाक विभाग जारी करेगा स्पेशल कवर

डाक विभाग राजस्थान सर्किल द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव पर बुधवार को प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों पर छह स्पेशल कवर अलग-अलग डिविजन से जारी करेगा।

जयपुर। डाक विभाग राजस्थान सर्किल द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव पर बुधवार को प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों पर छह स्पेशल कवर अलग-अलग डिविजन से जारी करेगा।  अर्जुन लाल सेठी (जयपुर) प्रदेश में क्रांतिकारी गतिविधियों के संचालक पंडित अर्जुनलाल सेठी ही थे। उनमें राष्ट्रभक्ति का अटूट जज्बा था। 1905 के बंगाल के स्वदेशी आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। प्रसिद्ध क्रांतिकारी रासबिहारी बोस, चन्द्रशेखर आजाद से उनके घनिष्ठ संबंध थे। सेठी कॉलोनी स्थित अर्जुन लाल सेठी पार्क में बुधवार सुबह 10:45 बजे अर्जुनलाल सेठी का कवर जारी किया जाएगा। वीरबाला कालीबाई (डूंगरपुर) मात्र 12 साल की उम्र में वीरबाला कालीबाई ने अपने गुरु सेंगाभाई के प्राणों की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए। पाल नामक गांव में चल रही पाठशाला को मजिस्ट्रेट द्वारा बंद करने का आदेश देने के बाद विरोध करने वाले सेंगाभाई को ट्रक से बांधकर पुलिस घसीटती हुई ले गई। वीरबाला ने ट्रक की रस्सी काटकर गुरु को पुलिस के चुंगल से छुड़ाया था। फिर पुलिस ने कालीबाई पर गोलियां चला दी थी।  केसरी सिंह बारहठ (भीलवाड़ा) प्रसिद्ध राजस्थानी कवि और स्वतंत्रता सेनानी केसरी सिंह बारहठ ने पिंगल-डिंगल भाषा में काव्य सृजन किया था। बारहठ ने रास बिहारी बोस के साथ लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय की सवारी पर बम फेंका था। कठोर यातना सहकर भी इन्होंने अपने क्रांतिकारी साथियों का भेद ब्रिटिश सरकार को नहीं दिया। मोतीलाल तेजावत (उदयपुर) आदिवासियों का मसीहा मोतीलाल तेजावत ने वनवासी संघ स्थापित किया था। भील, गरासिया और अन्य खेतीहर किसानों पर होने वाले सामन्ती अत्याचारों का विरोध किया और सबको एकजुट किया। उन्होंने किसानों से बेगार बंद कराकर कामगारों को उनकी उचित मजदूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वह ग्रादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे थे। बाल मुकुंद बिस्सा (नागौर) आदिवासियों का मसीहा मोतीलाल तेजावत ने वनवासी संघ स्थापित किया था। भील, गरासिया और अन्य खेतीहर किसानों पर होने वाले सामन्ती अत्याचारों का विरोध किया और सबको एकजुट किया। उन्होंने किसानों से बेगार बंद कराकर कामगारों को उनकी उचित मजदूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वह ग्रादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे थे। बाल मुकुंद बिस्सा (नागौर) 1924 में चरखा एजेंसी व खादी भंडार की स्थापना की। 1942 में जयनारायण व्यास के नेतृत्व में शुरू हुए जन आंदोलन के दौरान बालमुकुन्द बिस्सा को भारत रक्षा कानून के तहत जोधपुर की जेल में डाल दिया गया। इन्हें राजस्थान का जतिन दास कहा जाता है। गणेशलाल व्यास उस्ताद साहित्य सूरमाओं की फेहरिस्त में कई नाम शामिल होेने के बावजूद सबसे अलग थे जनकवि उस्ताद गणेश लाल व्यास। मानव की परेशानियों व उनके दर्द को अपने स्वर देकर वे जनकवि कहलाए। लोकगीतों को काव्य रुप में संजोकर इन्होंने महान कार्य किया। वह राजस्थानी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी के भी ज्ञानी थे। राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृत अकादमी बीकानेर ने इनके नाम पर पुरस्कार भी घोषित कर रखा है जो राजस्थानी भाषा पद्य विद्या के लिए दिया जाता है।

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