तय नीति के अनुसार हर वर्ष 35 से 40 विमान मिलें तो सुधरेंगे हालात, वायु सेना के पास लड़ाकू विमानों की कमी: एपी सिंह
प्रतिवर्ष 35 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत
नई दिल्ली। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने माना है कि वायु सेना के पास मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लड़ाकू विमानों के साथ-साथ अधिकारियों और वायु सैनिकों की कमी है लेकिन यह चिंता की बात नहीं है और इन कमियों को पूरा करने के लिए बनाई गई रणनीति और योजनाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समय पर पूरी हो जाती हैं तो स्थिति काफी सुधर जाएगी। एयर चीफ मार्शल सिंह ने वायु सेना दिवस शनिवार को यहां वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह स्थिति विमानों की आपूर्ति के निर्धारित कार्यक्रम में निरंतर हो रही देरी के कारण उत्पन्न हुई है।
स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाए जाने के विभिन्न कार्यक्रमों में देरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ये कार्यक्रम निर्धारित समय पर पूरे हो जाते हैं तो स्थिति में सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि वायु सेना को हर वर्ष कम से कम 35 से 40 लड़ाकू विमानों की जरूरत है और यदि ऐसा होता है तो स्थिति काफी सुधर सकती है।
सभी हितधारकों को मिलकर प्रयास करने होंगे
उन्होंने कहा कि स्वदेशी विमानों के बारे में सभी हितधारकों को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने लड़ाकू विमानों के सौदों में होने वाली देरी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन विमानों के समय पर मिलने की उम्मीद थी वह पूरी नहीं हो सकी। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि विमानों की कमी बड़ी चिंता का विषय नहीं है।
फ्रांस के साथ इस साल रक्षा सौदा संभव
लड़ाकू विमानों के इंजनों के लिए विदेश पर निर्भरता कम करने के लिए उन्होंने कहा कि इसके बारे में ठोस निर्णय लिए जाने की जरूरत है। फ्रांस के साथ बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान सौदे के बारे में उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे मौजूदा वित्त वर्ष में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
पाक को चीनी विमान मिलना चिंताजनक
चीन द्वारा पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान दिए जाने को उन्होंने चिंता का विषय करार दिया है। यदि देश में ही बनाए जाने वाले उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एमका) के कार्यक्रम में देरी होती है तो दूसरे विकल्पों के बारे में सोचा जाना चाहिए। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि वायु सेना के लिए अलग से ड्रोन फोर्स बनाए जाने की जरूरत नहीं है।

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