‘कितना भी प्रदर्शन कर लें, इस्तीफा नहीं देंगे ज्ञानेश कुमार’, रामदास अठावले का विपक्ष को दोटूक जवाब
चुनाव आयोग द्वारा 13 करोड़ नाम हटाए जाने के कारणों का स्पष्टीकरण
श्रीनगर। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष के लगातार जारी प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने रविवार को कहा कि विपक्ष चाहे कितना भी विरोध-प्रदर्शन कर ले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे। अठावले ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में पूरी तरह से सही कदम उठाया है। श्रीनगर में एक पत्रकार वार्ता में अठावले ने कहा, आप कितना भी विरोध प्रदर्शन कर लें, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे। वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। अठावले ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्षी दलों को विरोध जताने का अधिकार है, लेकिन उन्हें आम जनता के लिए परेशानियां खड़ी नहीं करनी चाहिए और न ही बिना किसी ठोस आधार के चुनाव आयोग पर बार-बार गड़बड़ी के आरोप लगाने चाहिए।
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की कार्रवाई का बचाव करते हुए अठावले ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने जांच-परख के बाद देशभर में लगभग 13 करोड़ नाम हटाए हैं। इनमें पलायन, दोहरी नामदर्जी, लंबे समय से मतदान न करना और मतदाताओं की मृत्यु होना मुख्य कारण रहे हैं। अठावले के मुताबिक, लगभग छह करोड़ लोग अपने मूल निवास स्थान से दूसरी जगहों पर चले गए हैं, जबकि करीब एक करोड़ मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 2.8 करोड़ नाम दिवंगत मतदाताओं के थे। अठावले ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों पर इस मुद्दे पर राजनीति करने और सरकार को घेरने की कोशिश करने का आरोप लगाया। वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि मतदान केंद्रों और मतगणना के समय उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट मौजूद रहते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं बचती।
उन्होंने कहा, इसलिए चुनाव आयोग की शिकायत करना सही नहीं है। राहुल गांधी का रुख संविधान के खिलाफ है। राहुल गांधी और विपक्ष जानबूझकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। वे विरोध-प्रदर्शनों के जरिए आम लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करने में लगे हैं। सीजेपी पर तंज कसते हुए अठावले ने विरोध-प्रदर्शनों में उसकी भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों के समर्थन में नीट परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा उठाना तो समझ आता है, लेकिन चुनाव आयोग के खिलाफ उनका यह आंदोलन पूरी तरह अनुचित है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगी पाबंदियों के संबंध में अठावले ने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनों पर रोक लगाई है और चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन कर इसमें शामिल होने वालों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
पिछली सरकारों के कार्यकाल में अपने आंदोलन के अनुभवों का जिक्र करते हुए अठावले ने महाराष्ट्र में दलितों पर हुए अत्याचारों के खिलाफ किए गए प्रदर्शनों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस दौर में भी प्रदर्शनकारियों को पुलिसिया कार्रवाई और बंदिशों का सामना करना पड़ता था। उनकी यह टिप्पणी मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया में धांधली के आरोपों को लेकर विपक्ष के लगातार हो रहे विरोध के बीच आई है। गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है।
चुनावी संस्था का बचाव करने के साथ ही अठावले ने यह भी स्वीकार किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कुछ गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने आयोग से पारदर्शिता बनाए रखने और हर पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। अठावले ने कहा, हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन मतदाताओं के नाम गलती से कट गए हैं, वे दोबारा अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि विपक्षी दल विरोध करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके प्रदर्शनों से जनता को बेवजह परेशानी न हो। इसके साथ ही उन्होंने बैरिकेड तोड़ने और पुलिस से भिड़ने जैसी हरकतों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई पूरी तरह जायज है।

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