भारतमाला मुआवजा अनियमितता: ईडी ने 12.78 करोड़ की 62 संपत्तियां कुर्क की, आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत प्रस्तुत 

राजस्व अधिकारियों और भूमि दलालों की कथित मिलीभगत

भारतमाला मुआवजा अनियमितता: ईडी ने 12.78 करोड़ की 62 संपत्तियां कुर्क की, आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत प्रस्तुत 
छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने अवैध रूप से अधिक मुआवजा लेने के मामले में गांधी-तिवारी परिवार की 12.78 करोड़ रुपये की 62 संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इस प्रकरण में अब तक कुल 36.14 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच हो चुकी है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग की भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण मुआवजा अनियमितता मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गांधी-तिवारी परिवार से संबंधित 12.78 करोड़ रुपये मूल्य की 62 चल एवं अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। एजेंसी ने 4.69 करोड़ रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड भी अटैच किए हैं तथा जय प्रकाश गांधी सहित 14 आरोपियों के विरुद्ध विशेष न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत प्रस्तुत की है।

ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा बीती रात जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 31 जुलाई 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर क्रमांक -17/2026 जारी किया गया। जांच में पाया गया कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ भूमि स्वामियों, भूमि दलालों और राजस्व अधिकारियों ने कथित रूप से आपसी साजिश कर अधिक मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से जमीनों का कृत्रिम विभाजन कराया। जांच एजेंसी के अनुसार अधिक मुआवजा हासिल करने के लिए बिक्री व गिफ्ट डीड के माध्यम से भूमि परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम स्थानांतरित की गई। इसके बाद भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मुआवजा पात्रता बढ़ाई गई, जिससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान प्राप्त किया गया। ईडी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व अधिकारियों और भूमि दलालों की कथित मिलीभगत सामने आई है।

यह जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) , छत्तीसगढ़ द्वारा 23 अप्रैल 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। यह एफआईआर तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) एवं सक्षम भूमि अधिग्रहण अधिकारी अभनपुर, निरभय साहू सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी। बाद में मामले का आरोप पत्र विशेष न्यायालय, रायपुर में प्रस्तुत किया गया। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि जय प्रकाश गांधी एवं उनके परिवार को वास्तविक पात्रता के अनुसार 56.76 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था, जबकि उन्हें लगभग 9.83 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रकार लगभग 9.27 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय अर्जित की गई, जिसे अचल संपत्तियों, शेयर, म्यूचुअल फंड तथा अन्य वित्तीय निवेशों में लगाने का प्रयास किया गया।

जांच में उगेतरा गांव की उमा तिवारी की भूमिका भी सामने आई है। ईडी के अनुसार उन्होंने स्वयं को मृत भूमि स्वामी की दत्तक पुत्री बताते हुए कथित फर्जी राजस्व अभिलेखों के आधार पर लगभग 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त ग्राम नायकबांधा के अन्य लाभार्थियों द्वारा भी खसरों का विभाजन कर निर्धारित पात्रता से अधिक मुआवजा लेने के आरोप सामने आए हैं। ईडी ने बताया कि जय प्रकाश गांधी को तीन जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पूर्व 29 दिसंबर 2025 और 27 अप्रैल 2026 को की गई तलाशी कार्रवाई में 49 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी तथा 89.80 लाख रुपये मूल्य की 37,133 ग्राम चांदी जब्त की गई थी। एजेंसी इससे पहले भूमि दलाल गिरोह की लगभग 23.35 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां भी कुर्क कर चुकी है।

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ईडी के अनुसार ताजा कार्रवाई के बाद भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा अनियमितता प्रकरण में अब तक कुल 36.14 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजस्व विभाग के अनुसार अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर 159 खसरों में बांटा गया तथा मुआवजा दावों के लिए 80 नए नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए गए। विभाग के मुताबिक 559 मीटर भूमि का अनुमानित मुआवजा, जो लगभग 29.5 करोड़ रुपये होना था, कथित हेरफेर के बाद 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि निर्धारित की गई थी, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 78 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है।

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