भाजपा का कांग्रेस पर हमला: राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के रूप में अयोग्य, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का लगाया आरोप
ऐसे रवैये को जनता कर देगी खारिज
बेंगलुरु। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर हमला तेज करते हुए आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान के जरिये संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार कमजोर कर रहे हैं। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री आर. अशोक ने बुधवार को कहा कि राहुल गांधी संवैधानिक और संस्थागत प्रक्रियाओं का पालन करने के बजाय सड़क पर प्रदर्शन कर राजनीतिक विवादों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। चुनाव आयोग की आलोचना को लेकर कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने कहा, राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के रूप में अयोग्य हैं। वह संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार हमला कर रहे हैं। अशोक ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है और इसे सड़कों पर प्रदर्शनों के माध्यम से हटाया या चुनौती नहीं दी जा सकती है।
भाजपा नेता ने कहा, यदि चुनाव आयुक्त को हटाना है तो उसके लिए नियम-कायदे हैं। इसके लिए संसद की बैठक बुलाई जानी चाहिए, आरोपों को स्पष्ट किया जाना चाहिए, बहुमत सिद्ध होना चाहिए और फिर मामला मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास जाना चाहिए। अशोक ने राहुल गांधी पर चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और न्यायपालिका सहित संवैधानिक संस्थाओं पर चुनिंदा तरीके से सवाल उठाने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, राहुल गांधी ने किस संस्था को छोड़ा है? ईडी भाजपा है, सीबीआई भाजपा है, अब चुनाव आयोग भी भाजपा है और यहां तक कि न्यायपालिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा नेता ने कई राज्यों में चुनाव जीतने के बावजूद चुनाव आयोग की आलोचना करने पर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, यदि चुनावों में धांधली हो रही थी तो कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस कैसे जीती?
एसआईआर के बाद केरल में भी चुनाव हुए और कांग्रेस ने वहां भी जीत हासिल की। अशोक ने कांग्रेस पर चुनाव जीतने पर चुनाव आयोग को स्वीकार करने और हारने पर इस संस्था पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, जहां भी कांग्रेस जीतती है, वहां चुनाव आयोग अच्छा है, जहां हारती है, वहां ठीक नहीं है। यह राहुल गांधी की 'राहुकाल' की राजनीति है।
भाजपा नेता ने कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की मांग का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक नेताओं को केवल सड़क पर प्रदर्शनों के जरिये नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा, अगर मैं सड़क पर खड़े होकर चिल्लाने लगूं कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद से हट जाना चाहिए, तो क्या वह इस्तीफा दे देंगे? उन्हें तभी हटाया जा सकता है जब विधानसभा के भीतर आवश्यक बहुमत साबित हो जाए। अशोक ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर कांग्रेस के लगातार हमलों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता का विश्वास कम हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी इसी रास्ते पर चलती रही तो उसे इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, यदि कांग्रेस का यही रुख रहा तो आने वाले चुनावों में कर्नाटक और तेलंगाना की जनता उसे खारिज कर देगी।

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