दिल्ली सरकार ने सर्दियों से पहले ही जारी किया प्रदूषण नियंत्रण रोडमैप, रेखा गुप्ता ने कहा- विभागों को आवश्यक तैयारियां का मिलेगा पर्याप्त समय

हितधारकों को तैयारी के लिए नहीं मिल पाता था पर्याप्त समय

दिल्ली सरकार ने सर्दियों से पहले ही जारी किया प्रदूषण नियंत्रण रोडमैप, रेखा गुप्ता ने कहा- विभागों को आवश्यक तैयारियां का मिलेगा पर्याप्त समय
सरकार ने नवंबर-फरवरी के लिए नई वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था लागू की है। अब वैध PUC के बिना पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैर-BS-6 बाहरी व्यावसायिक वाहनों पर रोक रहेगी और पार्किंग शुल्क दोगुना होगा। 50% वर्क फ्रॉम होम, निर्माण गतिविधियों पर कड़ी निगरानी, एंटी-स्मॉग गन अनिवार्य और खुले में कचरा जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नई दिल्ली। सरकार ने सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए शीतकालीन वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था अधिसूचित कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को बताया कि अब तक आमतौर पर ऐसा होता था कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने या ग्रैप के तहत विभिन्न प्रतिबंध लागू होने के बाद लोगों को नई व्यवस्थाओं की जानकारी मिलती थी, जिससे नागरिकों, उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, निर्माण एजेंसियों, संस्थानों और अन्य हितधारकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। कई बार लोगों को असुविधा का भी सामना करना पड़ता था, लेकिन इस बार दिल्ली सरकार ने इस व्यवस्था को बदलने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि अब सरकार सर्दियों की शुरुआत से कई महीने पहले ही यह स्पष्ट कर रही है कि नवंबर से फरवरी के दौरान प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं, किन व्यवस्थाओं को लागू किया जा सकता है और विभिन्न क्षेत्रों से क्या अपेक्षाएं रहेंगी। इससे नागरिकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए), उद्योगों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, निर्माण एजेंसियों और सरकारी विभागों को अग्रिम योजना बनाने और आवश्यक तैयारियां करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पिछले कई वर्षों से नवंबर से फरवरी के बीच वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती रही है और वायु गुणवत्ता सूचकांक(एक्यूआई) अक्सर बहुत खराब और गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है। यह हालात हर वर्ष पैदा हो रहे हैं, इसलिए दिल्ली सरकार ने केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय अग्रिम तैयारी, समयबद्ध हस्तक्षेप और बेहतर समन्वय पर आधारित रणनीति अपनाई है। यह फ्रेमवर्क पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया गया है और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के पूरक के रूप में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी विभाग और एजेंसियां सर्दियों के महीनों में निरंतर तैयार रहें और प्रदूषण नियंत्रण उपाय प्रतिकूल परिस्थितियों के आने से पहले ही लागू किए जा सकें न कि केवल ग्रैप लागू होने के बाद।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अधिसूचित व्यवस्था के तहत दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) होगा। इसके अतिरिक्त एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर बीएस-छह वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा लेकिन सीएनजी, इलेक्ट्रिक, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को इस व्यवस्था से छूट दी जाएगी। सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सुधारने और निजी वाहनों के अत्यधिक उपयोग को कम करने के उद्देश्य से एक नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा। साथ ही यातायात दबाव कम करने, आवागमन को अधिक व्यवस्थित बनाने और प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए चरणबद्ध कार्यालय समय की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत सरकारी एवं निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत भौतिक उपस्थिति संबंधी प्रावधान लागू रहेंगे और शेष कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम के माध्यम से कार्य कर सकेंगे। आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट रहेगी।

उन्होंने कहा कि निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियां शहरी विकास के लिए आवश्यक हैं लेकिन सर्दियों के दौरान धूल प्रदूषण को नियंत्रित करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए परियोजना संचालकों, ठेकेदारों और नागरिकों को अपनी गतिविधियों की योजना पहले से तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि अत्यधिक प्रदूषण वाले समय में अतिरिक्त प्रदूषण भार न बढ़े। इसी के मद्देनजर एक नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण एवं ध्वस्तीकरण गतिविधियों को निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और धूल नियंत्रण उपायों के अनुरूप संचालित करना होगा। विशेष रूप से 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच, जब प्रदूषण का स्तर अधिक रहने की आशंका होती है, तब जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के हित में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। बड़े वाणिज्यिक ऊंचे भवनों और प्रमुख निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन, जल-कण आधारित धूल नियंत्रण प्रणाली और अन्य धूल नियंत्रण उपायों की स्थापना एवं संचालन अनिवार्य होगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए खुले में कचरा, पत्तियां या अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना अत्यंत आवश्यक है। सभी आरडब्ल्यूए, संस्थानों, प्रतिष्ठानों, ठेकेदारों और एजेंसियों को अपने क्षेत्रों में खुले में जलाने की गतिविधि को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। विशेष रूप से सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों द्वारा सर्दियों में आग जलाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए वैकल्पिक हीटिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि खुले में जलाने की घटनाओं की पहचान और रोकथाम के लिए फील्ड सर्विलांस और ड्रोन आधारित निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।

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