गंडक का रौद्र रूप: ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ 22 सेंटीमीटर ऊपर बहाव, अगले 48 घंटे भारी
गंगा के बैकफ्लो और दोहरे जलदबाव से तटबंधों पर संकट
पटना। बिहार में गंडक नदी ने बाढ़ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिया है और नदी का जलस्तर अपने अब तक के सर्वोच्च बाढ़ स्तर से 22 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने के बाद दो जिलों में तटबंधों की सुरक्षा को बड़ा झटका लगा है। सारण के पानापुर और मुजफ्फरपुर के साहेबगंज में तटबंधों में कटाव से बाढ़ की चुनौती गंभीर हो गई है। गंगा के बैकफ्लो से गंडक पर बढ़े दबाव के बीच अगले 48 घंटे तक स्थिति संवेदनशील बने रहने की आशंका है। हालांकि, नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू होने से कुछ राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन खतरे की आशंका अभी टली नहीं है।
बिहार सरकार के जलसंसाधन विभाग की एक अक्टूबर की गंडक फ्लैश फ्लड रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। गोपालगंज के डुमरियाघाट में करीब 36 घंटे से तथा सारण के रेवाघाट और वैशाली के लालगंज में लगभग 21 घंटे से नदी का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर बना हुआ है। इससे गंडक के बाएं और दाएं दोनों तटबंधों पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न हो गया है।
गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण गंडक में बैकफ्लो का दबाव बन रहा है। इस दोहरे जलदबाव ने तटबंधों की सुरक्षा की चुनौती और बढ़ा दी है। कई स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई है। विभागीय अभियंताओं और कर्मियों की ओर से संवेदनशील स्थलों पर लगातार निगरानी करते हुए सुरक्षा एवं नियंत्रण के लिए सघन बाढ़ संघर्षात्मक कार्य चलाया जा रहा है।
विभाग के अनुसार, तमाम प्रयासों के बावजूद सारण जिले के पानापुर प्रखंड में राइट सारण तटबंध में कटाव से ब्रिच हो गया है। वहीं मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के अंतर्गत एक ङ्क्षरग बांध में भी कटाव के कारण टूट हुई है। इन घटनाओं के बाद तटबंधों की सुरक्षा को लेकर चुनौती बढ़ गई है। हालांकि, अन्य सभी संवेदनशील स्थल फिलहाल सुरक्षित और नियंत्रण में बताए गए हैं। वहां लगातार सघन बाढ़ संघर्ष कार्य जारी है।

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