केंद्र-राज्यों के बीच बनेगा मजबूत समन्वय, हर माह ऑनलाइन बैठक और साप्ताहिक स्तर पर होगी कृषि समीक्षा : चौहान

22 अक्टूबर से पूरे देश में चलेगा 'खेत बचाओ अभियान'

केंद्र-राज्यों के बीच बनेगा मजबूत समन्वय, हर माह ऑनलाइन बैठक और साप्ताहिक स्तर पर होगी कृषि समीक्षा : चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी अभियान-2026 के दौरान मासिक समीक्षा बैठकों और 22 अक्टूबर से 'खेत बचाओ अभियान' शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने पीएम-आरकेवीवाई के तहत 10 राज्यों को ₹1200 करोड़ से अधिक की स्वीकृति सौंपी और नकली खाद-बीज पर सख्त कार्रवाई व दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को घोषणा की कि केंद्र में होने वाली साप्ताहिक समीक्षा की तर्ज पर अब हर महीने राज्यों के साथ नियमित तरीके से ऑनलाइन बैठकें की जाएंगी, जिसमें कृषि में हो रही प्रगति की निरंतर समीक्षा होगी। चौहान यहां चल रहे राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान-2026 के दूसरे दिन हितधारकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर कृषि मंत्री, कृषि सचिव, राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, केवीके, आत्मा, एफपीओ, प्रगतिशील किसानों, प्रोसेसर्स, एक्सपोर्टर्स और केंद्र सरकार के नोडल अधिकारियों को जोड़कर एक सशक्त राज्य कृषि टीम बनाई जाएगी। वहीं, जिला स्तर पर कलेक्टर, डीडीए, आत्मा, केवीके, आईसीएआर वैज्ञानिकों, बैंकर्स और किसानों की मासिक बैठकें होंगी। 

कृषि अभियानों की पूर्व तैयारी के लिए इंटरफेस बैठकों का वार्षिक कैलेंडर तय करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि हर साल खरीफ के लिए 10 मई को जिला स्तरीय और 17 मई को राज्य स्तरीय बैठक होगी। इसी प्रकार रबी अभियान के लिए 10 सितंबर को जिला स्तरीय और 17 सितंबर को राज्य स्तरीय बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही, देश भर में एक ही दिन एकदिवसीय विशेष बैठक भी होगी, जिसमें पूरे देश में एक साथ कृषि मंत्री, अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक किसानों के हित में जुड़ेंगे। 

केंद्रीय मंत्री चौहान ने मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को लेकर इस साल 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक पूरे देश में व्यापक'खेत बचाओ अभियान चलाने का आह्वान किया। इस अभियान में सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दिया जाएगा ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति और मित्र कीट सुरक्षित रहें। इसके साथ ही, पूर्वी भारत के राज्यों- झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में धान कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन की खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाएगा। 

इस साल की रबी तैयारियों के तहत उन्होंने मिट्टी में नमी और पानी की उपलब्धता के आधार पर ही फसलों और उन्नत बीजों की बुवाई की सलाह देने पर बल दिया। उन्होंने फसलों को बीमारियों व कीटों से बचाने की पुख्ता व्यवस्था करने, सभी पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सेवा देने और फसल बीमा योजना के अंतर्गत पारदर्शी क्रॉप कटिंग प्रयोग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य के मंत्री स्वयं सभी विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करें।

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इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को मंच पर ही 1200 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय स्वीकृति पत्र प्रदान किए। इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल को 290 करोड़ रु., हरियाणा को 198 करोड़ रु., छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रु. तथा अन्य राज्यों को धन स्वीकृति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय पर संसाधन भी उपलब्ध करा रही है ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर तुरंत शुरू हो सके। 

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देश की कृषि उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के बाद देश की कृषि विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन में औसत बढ़ोतरी पहले के 40 लाख टन के मुकाबले अब दोगुनी से अधिक होकर 84 लाख टन प्रतिवर्ष तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दो वर्षों में ही रबी खाद्यान्न उत्पादन में 205 लाख टन का अभूतपूर्व इजाफा दर्ज किया गया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक वृद्धि का श्रेय राज्यों के कृषि विभागों, वैज्ञानिकों और अन्नदाताओं के साझा परिश्रम को दिया। 

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देश में बीज और उर्वरक की उपलब्धता को पर्याप्त बताते हुए चौहान ने राज्यों को नकली खाद, नकली बीज और अमानक कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा जबरन टै​गिंग को पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश दिए। खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग (एकीकृत कृषि प्रणाली) और फसल विविधीकरण को मिशन मोड में अपनाने का आह्वान किया।

चौहान ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही और लाभकारी दाम दिलाने के लिए सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। इसमें कटाई के बाद फसल प्रबंधन, भंडारण और बिक्री की सुदृढ़ व्यवस्था शामिल है। उन्होंने कहा कि अरहर, उड़द और मसूर की एमएसपी पर 100 प्रतिशत सुनिश्चित सरकारी खरीद की जाएगी और 48 घंटे में भुगतान की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की परिकल्ना के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की नई बाजार नीति का लाभ उठाकर भारतीय कृषि उत्पादों, फलों, सब्जियों और अनाज को वैश्विक निर्यात से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को उपज के बेहतरीन दाम मिल सकें और भारत दुनिया का प्रमुख फूड बास्केट बन सके।

सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट सहित केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विभिन्न कृषि संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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