महात्मा बुद्ध से जुड़े स्थलों और अवशेषों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता : करोड़ों लोगों ने किए पवित्र अवशेषों के दर्शन, मोदी ने कहा- लंबे इंतजार के बाद बुद्ध से जुड़ी भारतीय धरोहर वापस लौटी 

करोड़ों लोगों ने इन पवित्र अवशेषों का दर्शन किए 

महात्मा बुद्ध से जुड़े स्थलों और अवशेषों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता : करोड़ों लोगों ने किए पवित्र अवशेषों के दर्शन, मोदी ने कहा- लंबे इंतजार के बाद बुद्ध से जुड़ी भारतीय धरोहर वापस लौटी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘प्रकाश और कमल : जागृत व्यक्ति के अवशेष’ का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत इन स्थलों का संरक्षण और विकास करेगा। 127 साल बाद पिपरहवा की वस्तुएं लौटी हैं। बुद्ध की विरासत और संदेशों को जीवंत बनाए रखना भारत की प्राथमिकता है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि महात्मा बुद्ध से जुड़े जो भी स्थल हैं, उनका संरक्षण और विकास करना सरकार की प्राथमिकता है। वह महात्मा बुद्ध से संबंधित अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के यहां आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मोदी ने कहा कि सवा सौ साल के इंतजार के बाद महात्मा बुद्ध से जुड़ी भारतीय धरोहर और विरासत वापस लौटी है और अब भारतीय जनमानस इन पवित्र अवशेषों का दर्शन करके उनका आशीर्वाद पा सकेगा। उनका कहा कि 2026 की शुरुआत में ही यह उनके लिए बहुत प्रेरणादायक अवसर है कि उनके पहले सार्वजनिक कार्यक्रम की शुरूआत भगवान बुद्ध के चरणों से हो रही है।

प्रधानमंत्री जिस प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे उन पवित्र अवशेषों में कुछ हड्डियां भी हैं और माना जाता है कि ये भगवान बुद्ध की हड्डियों के अवशेष हैं। ये अवशेष ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के एवं प्राचीनतम माने जाते हैं। इस भव्य प्रदर्शनी में 127 साल बाद पवित्र पिपरहवा की वापस लाई गई वस्तुएं रखी गई हैं। प्रदर्शनी का नाम प्रकाश और कमल : जागृत व्यक्ति के अवशेष रखा गया है।

मोदी ने समारोह में कहा कि करोड़ों लोगों ने इन पवित्र अवशेषों का दर्शन किए हैं और यह अवशेष पूरी दुनिया को नई राह दिखाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत केवल इन अवशेषों का संरक्षक नहीं है, बल्कि उनके संदेशों का जीवंत प्रवाह भी है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास रहता है कि दुनिया में जो स्थल भगवान बुद्ध से जुड़े हैं उनके विकास में भारत सहयोग करे।

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मोदी ने कहा कि उनका जन्म स्थान भी बौद्ध परंपरा का बड़ा केंद्र रहा है और आज सरकार इन स्थलों का संरक्षण भी कर रही है। अभी जम्मू कश्मीर में बौद्ध काल की परंपरा का पता चला है और उसके संरक्षण का काम भी सरकार कर रही है। श्रावस्ती, सांची, अमरावती, नागार्जुन सागर जैसी जगहों में बौद्ध विरासत का संरक्षण और विकास किया जा रहा है। उनका कहना था कि महात्मा बुद्ध के संदेश पालि भाषा में थे, इसलिए इसको शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया जा रहा है ताकि इन संदेशों उसके मूल रूप में समझा जा सके।

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इससे पहले संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कि ये वस्तुएं महात्मा बुद्ध की जीवंत परंपरा से जुड़ी हुई हैं। यह विरासत को बनाए रखने के संकल्प का परिणाम है। 

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