कहर बरपाने के लिए तैयार चक्रवात ‘अर्नब’: आंध्र-ओडिशा में रेड अलर्ट, 60 से ज्यादा ट्रेनें रद्द
28 अक्टूबर को यनम तट से टकराने की चेतावनी
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मौसम विभाग ने 28 और 29 अक्टूबर को राज्य के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी मंगलवार को जारी की है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर 200 मिलीमीटर तक बारिश होने का अनुमान जताया गया है। संभावित आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 12 जिलों को अति संवेदनशील घोषित करते हुए 779 राहत शिविरों और बचाव दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आज से चक्रवात का प्रभाव बस्तर संभाग के जिलों में दिखाई दे सकता है। बुधवार को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। इस दिन चार जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि राजधानी रायपुर सहित कई जिलों को ऑरेंज अलर्ट की श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तरी छत्तीसगढ़ में बारिश का प्रभाव बढ़ने का अनुमान है।
मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी के मुताबिक, कल को चक्रवात का सबसे अधिक प्रभाव दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में रह सकता है। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तरी जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। आज सुकमा, बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तथा एक-दो स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया है। इस दौरान गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई है। अगले दो दिनों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में मध्यम बारिश तथा दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश होने का अनुमान है।
राजधानी रायपुर में मंगलवार को आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, शहर का अधिकतम तापमान लगभग 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। इससे पहले सोमवार को प्रदेश में मौसम शुष्क रहा और किसी भी स्थान पर बारिश नहीं हुई। रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक था। न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.3 डिग्री कम था। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 12.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, माना एयरपोर्ट में 31.2 डिग्री और जगदलपुर में 31.1 डिग्री सेल्सियस रहा।
चक्रवात के संभावित खतरे के मद्देनजर दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में कल स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। दूसरी ओर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए मौसम आधारित परामर्श जारी किया है। विश्वविद्यालय ने किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान सहित अन्य फसलों की कटाई स्थगित रखने की सलाह दी है। जिन किसानों ने फसलों की कटाई कर ली है, उन्हें उपज को सुरक्षित और ढके हुए स्थानों पर रखने तथा खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की समुचित व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि संभावित भारी बारिश से कृषि उपज को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
राज्य सरकार ने चक्रवात से उत्पन्न होने वाली संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। कल हुई समीक्षा बैठक के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 26 अक्टूबर को आपदा प्रबंधन संबंधी कार्ययोजना जारी की। इसके अंतर्गत सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर को अति संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों के 763 बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान की गई है। इसके अतिरिक्त शेष 21 जिलों में भी 1,006 संवेदनशील गांव चिह्नित किए गए हैं।
कार्ययोजना के अनुसार, 27 और 28 अक्टूबर को इन जिलों में भारी बारिश तथा तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए राज्यभर में 779 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं। इनमें लगभग एक लाख लोगों को ठहराने की क्षमता है। अति संवेदनशील 12 जिलों में 341 और अन्य 21 जिलों में 438 राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयों, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन को विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में प्राथमिकता देने को कहा गया है। इसके अलावा तेज हवाओं से क्षतिग्रस्त होने की आशंका वाले कमजोर मकानों की पहचान कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से लोगों को सतर्क किया जा रहा है। नागरिकों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
आपदा प्रबंधन के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की सात टीमों को तैयार रखा गया है। प्रत्येक टीम में 36 जवान शामिल हैं। इन टीमों की तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर में की जा रही है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की एक टीम दुर्ग में पहले से मौजूद है। इसके अतिरिक्त सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी एक-एक एनडीआरएफ टीम तैनात करने की तैयारी की जा रही है। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए विभिन्न जिलों में नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवानों और 3,895 आपदा मित्रों की सेवाएं ली जाएंगी। एसडीआरएफ के पास राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 1,450 उपकरण उपलब्ध हैं, जिनमें पानी के भीतर देखने वाले कैमरे, हाइड्रोलिक कटर और रबर बोट सहित अन्य संसाधन शामिल हैं।
संभावित आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए चिकित्सा संस्थानों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।अति संवेदनशील 12 जिलों में 12 जिला अस्पतालों, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 215 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों तथा आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसी प्रकार अन्य 21 जिलों में 21 जिला अस्पतालों, 153 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 609 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आपात परिस्थितियों के लिए तैयार रखा जा रहा है।
आपदा के दौरान घायल व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ पशुओं की सुरक्षा, उपचार और टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सा विभाग को भी आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित आपदा की निगरानी और राहत कार्यों के समन्वय के लिए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीस घंटे संचालित किया जा रहा है। आपात स्थिति में नागरिक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। राज्य नियंत्रण कक्ष को सभी जिलों के कंट्रोल रूम से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित करने तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के संपर्क नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। संभावित भारी बारिश के मद्देनजर इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के जलस्तर पर विशेष निगरानी रखने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग से समन्वय किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त गंगरेल बांध, ओडिशा के खातीगुड़ा बांध और मुरान बांध से संबंधित अधिकारियों के साथ भी संपर्क स्थापित किया गया है। बांधों से पानी छोड़ने की आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्रशासन को 48 घंटे पहले सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवश्यकता पड़ने पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी भी की है। इसके लिए रायपुर और बस्तर स्थित हेलीकॉप्टर बेस से संपर्क किया गया है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि नदियों, नालों, पुल-पुलियों और जलमग्न सड़कों पर खतरे की स्थिति में आवागमन तत्काल प्रतिबंधित किया जाए। बाढ़ से घिरे गांवों और प्रभावित बस्तियों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार ने चक्रवात का प्रभाव समाप्त होने के बाद संभावित नुकसान के आकलन और पुनर्वास कार्यों की रूपरेखा भी तैयार की है। राजस्व, कृषि, पंचायत, पशुपालन, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार विभाग को मकानों, कृषि फसलों, पशुधन, सड़कों तथा संचार सुविधाओं को होने वाली क्षति का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता की जांच, जल शुद्धिकरण, साफ-सफाई, कीट नियंत्रण और संक्रामक बीमारियों की निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण के लिए भी आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और नालियों की मरम्मत तथा बाधित बिजली और दूरसंचार सेवाओं को जल्द बहाल करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और संभावित चक्रवाती परिस्थितियों में जनहानि रोकने तथा आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

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