UN में भारत का बड़ा संदेश: ऊर्जा परिवर्तन के लिए सुरक्षित वैश्विक सप्लाई चेन जरूरी, खनिज बनें विकास का इंजन

महत्वपूर्ण खनिजों के समान लाभ की उठाई मांग

UN में भारत का बड़ा संदेश: ऊर्जा परिवर्तन के लिए सुरक्षित वैश्विक सप्लाई चेन जरूरी, खनिज बनें विकास का इंजन
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने महत्वपूर्ण ऊर्जा खनिजों की एक पारदर्शी और विविध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाने का आह्वान किया है। भारत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ ऊर्जा के इन संसाधनों का लाभ विकासशील देशों तक समान रूप से पहुँचना चाहिए, न कि ये असमानता बढ़ाएं।

न्यूयार्क। भारत ने बुधवार को ऊर्जा परिवर्तन के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित, पारदर्शी और विविध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाने का आह्वान किया। भारत ने जोर देकर कहा कि ये संसाधन ‘सतत विकास के इंजन बनने चाहिए, न कि असमानता का एक और जरिया।’ संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवर्तन खनिजों पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि ये खनिज वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके साथ ही ये विकासशील देशों को औद्योगीकरण तेज करने, गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करने और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने का अवसर भी देते हैं।

उन्होंने कहा, "ऊर्जा परिवर्तन के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिज सतत विकास के इंजन बनने चाहिए, न कि असमानता का एक और जरिया।" पर्वतनेनी ने कहा कि भारत एक ऐसी 'सुरक्षित, पारदर्शी और विविध आपूर्ति श्रृंखला' बनाने के लिए सभी भागीदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है जो साझा समृद्धि को बढ़ावा दे और यह सुनिश्चित करे कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का लाभ सभी में समान रूप से बंटे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग ऐसा होना चाहिए जिससे देश वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी बेहतर भागीदारी बना सकें और अधिक लाभ कमा सकें।

राजदूत ने भारत के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक होने के नाते, भारत राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के माध्यम से इस व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, जबकि खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (काबिल) रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां कर रही है। पर्वतनेनी ने वैश्विक सहयोग को लागू करने के लिए भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए तीन मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "प्राकृतिक संसाधनों पर राष्ट्रीय स्वामित्व और संप्रभुता हमेशा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव बनी रहनी चाहिए।"

राजदूत ने ऐसी साझेदारियों का आह्वान किया जो 'आपसी सहमति की शर्तों पर निवेश, तकनीक के हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और कौशल विकास' को बढ़ावा दें, जिससे विकासशील देशों को अपनी प्रसंस्करण, रिफाइनिंग और विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिले। भारतीय राजनयिक ने इस बैठक का स्वागत करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों पर अंतरराष्ट्रीय बातचीत को आगे बढ़ाने में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के नेतृत्व के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

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