चीन सीमा पर तनाव और व्यापार घाटे को लेकर खरगे का केंद्र पर हमला, पूछा- क्या एक और टकराव की तैयारी?
'मेक इन इंडिया' की नीति पर सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चीन सीमा पर तनाव और चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर गुमराह करने की बजाय उन्हें संसद और देश को विश्वास में लेना चाहिए। खरगे ने शुक्रवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लगातार आमने-सामने की स्थिति बनी रहने की खबरें हैं और यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति हैं। सवाल किया कि डोकलाम और गलवान के बाद क्या एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि अगस्त में तवांग क्षेत्र के पास ताकसिंग में चीनी घुसपैठ की खबरें हैं। बड़ा प्रश्न यह है कि वाचा-दामई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 47 दिन बाद भी टकराव की स्थिति क्यों बनी हुई है। अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित होने संबंधी खबरें हैं और सरकार को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि गलवान में 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान के बाद वित्त वर्ष 2020-21 से चीन से भारत का आयात 102 प्रतिशत बढ़ा है जबकि चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है। उनका कहना था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी स्वीकार कर चुकी हैं कि चीन भारतीय निर्यात में बाधा डालता है इसके बावजूद सरकार चीनी निवेश पर प्रतिबंधों में ढील दे रही है और चीन से जुड़ी पात्र कंपनियों को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) देने पर विचार कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या 'मेक इन इंडिया' का मतलब अब 'चीन से आयात' रह गया है।
केंद्र सरकार और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई कम से कम 23 बैठकों और संवादों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी वाले विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर तथा कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36 बैठकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन बैठकों और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) तथा ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों में भागीदारी से भारत को क्या ठोस परिणाम मिले हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मई 2020 से पहले की भारतीय गश्त संबंधी पहुंच पूरी तरह बहाल हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सशस्त्र बलों पर देश को पूरा भरोसा है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार को विपक्ष पर हमला करने की बजाय संसद और देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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