जातिगत गणना पर सरकार के जवाब को सार्वजनिक करते हुए राहुल गांधी ने कहा, सरकार के पास ठोस रूपरेखा की कमी

जाति जनगणना पर राहुल गांधी का हमला

जातिगत गणना पर सरकार के जवाब को सार्वजनिक करते हुए राहुल गांधी ने कहा, सरकार के पास ठोस रूपरेखा की कमी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में पूछे गए सवालों का हवाला देते हुए जाति जनगणना पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास न स्पष्ट योजना है, न समयसीमा, न ही सफल राज्यों से सीखने की इच्छा। राहुल ने 2025-26 में जनगणना के लिए मात्र 575 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठाते हुए इसे बहुजनों के साथ “खुला विश्वासघात” बताया।

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और संसद में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक बार सत्तारूढ़़ केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जाति जनगणना के सवाल पर सरकार के जवाब को सार्वजनिक कर दिया। राहुल गांधी ने सरकार के जवाब को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए लिखा कि, संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना पर कई सवाल पूछे और उनका जवाब चौंकाने वाला है। न ठोस रूपरेखा, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा, और न ही जनता से संवाद। इसके आगे राहुल गांधी ने लिखा कि, दूसरे राज्यों की सफल जाति जनगणनाओं की रणनीति से सीखने की कोई इच्छा भी नहीं। मोदी सरकार की यह जाति जनगणना देश के बहुजनों के साथ खुला विश्वासघात है।

इसके आगे राहुल गांधी ने कहा कि, हेडलाइन तो दी गई, लेकिन इसमें डेडलाइन नहीं है। हम सब जानते हैं कि ऐसे काम में नरेंद्र मोदी कितने माहिर हैं। इसी को देखते हुए राहुल गांधी जी ने कहा है कि सरकार जातिगत जनगणना को लेकर पूरा रोडमैप सामने रखे। हम छह साल से जनगणना का इंतज़ार कर रहे हैं और इससे पहले तो जाति शब्द का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन कल अचानक जातिगत जनगणना की बात कह दी गई।

जबकि, 2025-26 के बजट में सेन्सस कमिश्नर के ऑफिस-जिसपर जनगणना करने की जिम्मेदारी होती है- उसे सिर्फ 575 करोड़ का बजट दिया गया है। इससे पहले ख़ुद दिसंबर 2019 को नरेंद्र मोदी देश को बता चुके हैं कि जनगणना कराने में 8,254 करोड़ का खर्च आएगा। ऐसे में सवाल है कि सरकार 575 करोड़ रुपए में कौन सी जनगणना कराएगी?

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