नितिन नवीन की नई टीम की घोषणा: वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष, स्मृति ईरानी महासचिव और पीयूष गोयल बन कोषाध्यक्ष
13 लोगों को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नयी टीम घोषणा की, जिसमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को महासचिव बनाया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी सूची के अनुसार नवीन ने वसुंधरा राजे सिंधिया सहित 13 लोगों को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। नवीन ने अनिल बलूनी पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्हें फिर से मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी है और बी एल संतोष को राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बनाये रखा गया है। इसके अलावा अनिल बलूनी मीडिया संयोजक बने रहेंगे। नई टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें चार राष्ट्रीय पदाधिकारी और दो राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्ष शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की इस नियुक्ति को सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारी देकर पार्टी समाजवादी पार्टी ( सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण की काट तैयार करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
नई टीम में रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा भाजपा ने उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा का अध्यक्ष बनाया है। अमरपाल मौर्य लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे हैं और पिछड़े वर्ग में पार्टी की पकड़ मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अल्पसंख्यक समुदाय को संदेश देने की कोशिश के तहत कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। बासित अली उत्तर प्रदेश भाजपा में अल्पसंख्यक चेहरा रहे हैं। पार्टी के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय के बीच संगठन की पहुंच बढ़ाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिलना विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य के महत्व को भी रेखांकित करता है। जानकारों की मानें तो भाजपा की कोशिश संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने की है।

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