असहमति होना किसी भी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इससे निर्णय प्रक्रिया रुकती नहीं: यादव
प्रक्रिया में असहमति स्वाभाविक
अलवर। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कहा है कि असहमति होना किसी भी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इससे निर्णय प्रक्रिया रुकती नहीं है। यादव ने यहां शनिवार रात पत्रकारों से कहा कि कुछ लोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि अंतिम निर्णय संबंधित संस्था का होता है।
उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग में दो आयुक्तों की टिप्पणियों के संदर्भ में कहा कि किसी भी सरकारी फाइल पर अलग-अलग अधिकारियों की राय अलग हो सकती है। दो अधिकारियों के बीच असहमति होने पर उनकी टिप्पणी दर्ज की जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरी प्रक्रिया रुक गई है।
यादव ने न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय की बड़ी पीठ में भी कई बार न्यायाधीशों की राय अलग-अलग होती है और फैसला बहुमत के आधार पर होता है। इसके बावजूद अंतिम निर्णय पूरी संस्था का माना जाता है। उन्होंने केरल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) दर्ज होने के बावजूद चुनाव हुए। इसके बावजूद विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन प्रक्रियाओं को लेकर भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति जनता के सामने है।
यादव ने चुनावी दावों को लेकर भी विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि अलवर में कुछ लोग चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी बातें करते हुए 60 सीटें जीतने तक के दावे करते हैं, लेकिन उनके साथ बैठे लोग भी ऐसे दावे सुनकर हैरान रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में दावे करना अलग बात है, लेकिन प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर जनता के बीच भ्रम नहीं फैलाया जाना चाहिए।

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