रवींद्रनाथ टैगोर से नवनेथेम "नावी" पिल्ले तक, इन भारतीय मूल की हस्तियों ने दुनिया में बढ़ाया देश का मान
टैगोर से कैलाश सत्यार्थी तक भारत के प्रमुख नाम
नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल है। भारत से जुड़े नोबेल विजेताओं की सूची में साहित्य, विज्ञान, अर्थशास्त्र और शांति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कई हस्तियां शामिल हैं। इनमें भारत में जन्मे और भारतीय नागरिकता रखने वाले व्यक्तियों के साथ विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं। 9 अक्टूबर 2026 को भारतीय तमिल मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नावी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा के बाद यह सूची फिर चर्चा में है। उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया है।
टैगोर से कैलाश सत्यार्थी तक भारत के प्रमुख नाम
रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। उनकी काव्य-कृति ‘गीतांजलि’ ने उन्हें विश्व साहित्य में विशिष्ट पहचान दिलाई। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई थे।

भौतिक विज्ञानी सी. वी. रमन को 1930 में प्रकाश के प्रकीर्णन पर शोध और रमन प्रभाव की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। उनकी खोज की स्मृति में भारत में हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

मदर टेरेसा को 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला। कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया।
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अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को 1998 में कल्याणकारी अर्थशास्त्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनके शोध ने गरीबी, अकाल और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कैलाश सत्यार्थी को 2014 में बच्चों के शोषण के खिलाफ संघर्ष और शिक्षा के अधिकार के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला। यह सम्मान उन्हें पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था।

विदेशी नागरिकता, लेकिन भारतीय मूल
भारतीय मूल के कई वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों ने विदेशी नागरिकता के साथ नोबेल पुरस्कार हासिल किया। हरगोबिंद खुराना को 1968 में आनुवंशिक कूट और प्रोटीन संश्लेषण पर काम के लिए चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला। सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को 1983 में तारों की संरचना और विकास से संबंधित सैद्धांतिक शोध के लिए भौतिकी का पुरस्कार मिला।
वेंकटरामन रामकृष्णन को 2009 में राइबोसोम की संरचना और कार्य पर शोध के लिए रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला। वहीं, अभिजीत बनर्जी को 2019 में वैश्विक गरीबी कम करने के प्रायोगिक दृष्टिकोण के लिए एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर के साथ अर्थशास्त्र का पुरस्कार दिया गया।
नवनेथेम "नावी" पिल्ले का नाम भी चर्चा में

2026 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नवनेथेम "नावी" पिल्ले का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं। नोबेल समिति ने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उनके योगदान को रेखांकित किया।
इसके अलावा, वी. एस. नायपॉल को 2001 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। उनकी रचनाओं में उत्तर-औपनिवेशिक समाजों की जटिलताओं को प्रमुखता मिली। 14वें दलाई लामा को 1989 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला, हालांकि उन्हें भारतीय नागरिक नोबेल विजेताओं की सूची में शामिल करना सही नहीं होगा।
महात्मा गांधी को कई बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था, लेकिन उन्हें यह सम्मान कभी नहीं मिला। इस तरह भारत और भारतीय मूल के लोगों का नोबेल पुरस्कारों में योगदान साहित्य से लेकर विज्ञान, अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय शांति तक फैला हुआ है।

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