असर खबर का : अब मिलेगी एमबीएस में एमआरआई जांच की सुविधा
न्यू मेडिकल कॉलेज के 13 कि.मी. लंबे चक्कर और जाम से मिलेगी मुक्ति
कोटा। एमबीएस में इलाज कराने आने वाले मरीजों को जल्द ही बडी सुविधा मिलने वाली है। शहर के सबसे बड़े महाराव भीमसिंह (एमबीएस) अस्पताल में अब जल्द ही मरीजों को एमआरआई जांच की सुविधा कैंपस के भीतर ही मिलने लगेगी। इसके लिए मशीन लगाने की स्वीकृति मिल चुकी है और पीपीपी मोड पर जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। एमबीएस अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को न केवल अतिरिक्त समय और लंबे सफर से मुक्ति मिलेगी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में तुरंत जांच होने से समय पर और सटीक इलाज भी मिल सकेगा।
स्पेस मैनेजमेंट और तकनीकी कमेटी का गठन
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश ने बताया कि एमआरआई मशीन स्थापित करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है उन्होनें बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक 'स्पेस मैनेजमेंट कमेटी' का गठन किया गया था, जिसने अस्पताल परिसर में मशीन स्थापना के लिए उपयुक्त स्थान का चयन कर लिया है। यहां पर ही एमआरआई की सुविधा शुरू होने से मरीजाें को मेडिकल कॉलेज जाने में आ रही परेशानी तो दुर होगी ही साथ की शहर में एक साथ दो जगह यह सुविधा होने से पुरे क्षेत्र को इसका बडा लाभ मिलेगा।
टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स
चार सदस्यों की एक तकनीकी कमेटी वर्तमान में मशीन के तकनीकी स्पेसिफिकेशन्स तैयार करने में जुटी है। इसके तय होते ही टेंडर ऑनलाइन अपलोड कर दिए जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया और नियमानुसार आपत्तियों के निस्तारण के बाद इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
वर्तमान में न्यू मेडिकल कॉलेज पर निर्भरता और मरीजों की दुर्दशा
एमबीएस अस्पताल में न्यूरोलॉजी से जुड़ी ओपीडी और आईपीडी दोनों का संचालन बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा, यहां की इमरजेंसी में सड़क हादसों और गंभीर रूप से घायल मरीजों की संख्या भी काफी अधिक रहती है।
13 किलोमीटर का सफर और ट्रैफिक का जोखिम
वर्तमान स्थिति यह है कि सिर की चोट (हेड इंजरी) या अन्य गंभीर मामलों में एमआरआई की जरूरत पड़ने पर मरीजों को एमबीएस से करीब 13 किलोमीटर दूर न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) भेजना पड़ता है। वार्ड में भर्ती मरीजों को जैसे-तैसे अस्पताल प्रशासन एंबुलेंस से भिजवाता है, जबकि आउटडोर के मरीजों को अपने स्तर पर यह सफर तय करना पड़ता है। शहर के व्यस्त ट्रैफिक के बीच से गुजरने वाले इस सफर में न केवल इलाज में देरी होती है, बल्कि गंभीर मरीजों की जान पर भी हमेशा खतरा मंडराता रहता है। पर्याप्त एंबुलेंस की कमी और लंबी दूरी के इस सफर से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
‘दैनिक नवज्योति’ ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
मरीजों को हो रही इस गंभीर समस्या, एंबुलेंस की भारी कमी और ट्रैफिक के बीच जान जोखिम में डालकर मरीजों को ले जाने के इस मुद्दे को ‘दैनिक नवज्योति’ ने पूरी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इस खबर के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और गंभीर परिणामों व मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए एमबीएस परिसर में ही एमआरआई जांच शुरू करने की कवायद को तेज किया गया।

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