30 साल की साधना से बदली हजारों नौनिहालों की तकदीर,हर साल शिक्षा पर खर्च करते हैं 80 हजार रुपए
भामाशाहों के सहयोग से संवारीं विद्यालयों की सुविधाएं
कोटा। शिक्षक का काम केवल कक्षा में पाठ पढ़ाना, परीक्षा की तैयारी करवाना या विद्यार्थियों को अच्छे अंक दिलाना ही नहीं है, बल्कि उनके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना और मुश्किल वक्त में उनका संबल बनना भी है। जब गरीबी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई छूटने की नौबत आ जाए, तब एक शिक्षक का छोटा-सा सहयोग भी उसके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। कोटा जिले के राजकीय विद्यालय में कार्यरत व्याख्याता डॉ. मनोज भारद्वाज शिक्षा को सेवा का माध्यम बनाकर इसी सोच को साकार कर रहे हैं।करीब तीन दशक की राजकीय सेवा में उन्होंने पढ़ाने के दायित्व को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए ‘मिशन सेवा’ और ‘मिशन मोटिवेशन’ को अपने जीवन का ध्येय बना लिया है।
पेन-कॉपी के अभाव में नहीं थमेगी पढ़ाई
कई बार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई महंगी फीस से नहीं, बल्कि पेन, कॉपी, किताब, गणवेश और सर्दियों के कपड़ों जैसी बुनियादी चीजों के अभाव में प्रभावित होती है। इसी जरूरत को समझते हुए डॉ. भारद्वाज ने जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को स्टेशनरी, पाठ्य सामग्री, रेफरेंस बुक, स्वेटर और जर्सी उपलब्ध करवाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने विद्यालय में ‘निःशुल्क स्टेशनरी कॉर्नर’ की अनूठी पहल की है, ताकि अभाव के कारण किसी बच्चे के मन में हीनभावना न आए।
घर-घर पहुंचकर 51 बच्चों को दोबारा जोड़ा
डॉ. भारद्वाज की सेवा विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। जब बच्चे स्कूल से दूर होने लगे, तो उन्होंने घर-घर पहुंचकर 51 ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से पढ़ाई की मुख्यधारा से जोड़ा। परिजनों से संवाद कर बच्चों की समस्याएं समझीं और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाकर दोबारा स्कूल भेजा।
टॉपर्स के साथ माता-पिता का सम्मान
‘मिशन मोटिवेशन’ के तहत वे बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उनके माता-पिता के साथ सम्मानित करते हैं। टॉपर्स को प्रोत्साहन राशि देने के साथ ही वे जरूरतमंद विद्यार्थियों की 12वीं बोर्ड परीक्षा की फीस स्वयं जमा करवाते हैं। वे विद्यार्थियों के शैक्षणिक व व्यक्तित्व विकास पर प्रतिवर्ष 70 से 80 हजार रुपए निजी स्तर पर खर्च करते हैं।
भामाशाहों को जोड़ संवारीं विद्यालयी सुविधाएं
व्यक्तिगत मदद के साथ उन्होंने भामाशाहों को जोड़कर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कुन्हाड़ी में करीब 10 लाख रुपए की लागत से बाउंड्रीवॉल का निर्माण करवाया। बड़गांव में सुविधा घर, नया खेड़ा में कंप्यूटर लैब और बालिता विद्यालय में वाटर मोटर लगवाने जैसे कार्यों से विद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण बेहतर बनाया।
राज्य स्तर पर सम्मानित, सफलता ही वास्तविक पहचान
उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें दो बार राज्य स्तरीय सम्मान सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा नवाजा जा चुका है। हालांकि, उनकी वास्तविक उपलब्धि उनके पढ़ाए विद्यार्थियों की सफलता है, जो आज शिक्षक, बैंक अधिकारी, इंजीनियर, डॉक्टर, पुलिस और रेलवे में सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. मनोज भारद्वाज की यह पहल साबित करती है कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना से भरी सोच की जरूरत होती है।

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