Voice Of Youth: आस्था के आगे छोटा-बड़ा कौन!युवाओं ने उठाई मंदिरों में VIP दर्शन बंद करने की मांग
बोले—भगवान के लिए अमीर-गरीब और ऊंचे पद पर बैठे सभी भक्त बराबर
कोटा। मंदिरों में भगवान के दर्शन करने की चाह हर भक्त के मन में होती है। कोई घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करता है, तो किसी को अपनी राजनीतिक पहुंच, रसूख और ऊंचे पद के कारण कुछ ही मिनटों में दर्शन करने का अवसर मिल जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भगवान के दरबार में भी VIP और आम भक्त के बीच अंतर होना चाहिए? क्या आस्था का मूल्य किसी व्यक्ति के पद, प्रतिष्ठा और राजनीतिक ताकत से तय किया जा सकता है? दैनिक नवज्योति के वॉइस ऑफ यूथ अभियान में युवाओं से चर्चा की।
'यह आस्था नहीं, केवल दिखावा है'
VIP दर्शन की व्यवस्था आस्था से ज्यादा दिखावा लगती है। कई बार ऊंचे पदों पर बैठे लोग मंदिर में दर्शन करने के बाद मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से इसका प्रचार भी करते हैं, जबकि भगवान के लिए अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा और ऊंचे-नीचे पद पर बैठा व्यक्ति सभी बराबर हैं। ऐसे में मंदिरों में VIP दर्शन की प्रथा पूरी तरह बंद होनी चाहिए, ताकि हर भक्त को समान अवसर मिल सके।
-खुशी चौधरी, कॉलेज स्टूडेंट
गरीब लाइन में, VIP सीधे भगवान के सामने—यह कैसा न्याय?
आम आदमी घंटों कतार में खड़े होकर भगवान के दर्शन का इंतजार करता है, जबकि VIP व्यक्ति मंदिर पहुंचते ही बिना लंबा इंतजार किए दर्शन कर लेते हैं। यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के बीच असमानता का भाव पैदा करती है। जब भगवान के लिए सभी समान हैं, तो दर्शन के लिए अलग-अलग व्यवस्था क्यों होनी चाहिए? VIP दर्शन बंद होने चाहिए और सभी को सामान्य कतार में लगकर ही दर्शन करने चाहिए।
-अरविन्द मीना, कॉलेज स्टूडेंट
भक्ति में दिखावा नहीं, सच्ची श्रद्धा जरूरी
भगवान उसी भक्त की भावना को महत्व देते हैं, जो सच्चे मन से उनकी आराधना करता है। VIP दर्शन को आस्था से अधिक दिखावे से जुड़ी व्यवस्था बताया। एक श्रद्धालु घंटों अपनी बारी का इंतजार करता है, जबकि दूसरा बिना कतार में लगे व्यक्ति से पहले दर्शन कर लेता है। मंदिर प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि दर्शन करने हैं, तो सभी भक्तों के लिए समान व्यवस्था होनी चाहिए।
-रीना बैरवा, कॉलेज स्टूडेंट
'VIP से पहले बुजुर्गों को मिले प्राथमिकता'
मंदिरों में VIP दर्शन की जगह बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बड़े मंदिरों में लंबी कतारों के कारण बुजुर्ग श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती है। कई बार उन्हें लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है, जिससे उनकी थकान और परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में विशेष सुविधा का लाभ रसूखदार लोगों के बजाय जरूरतमंद और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को मिलना चाहिए। बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करना भी ईश्वर की आराधना का ही एक रूप है।
-प्रदीप मीणा, कॉलेज स्टूडेंट

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