अम्बेडकर पीठ खत्म, वीसी को खबर तक नहीं : निरस्त पीठ पर वीसी ने डायरेक्टर तक कर दिया नियुक्त, खुद डायरेक्टर भी अनजान
संविधान निर्माता के साथ ऐसा खेल
राजस्थान विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर बनी अम्बेडकर पीठ कब खत्म हो गई, इसकी जानकारी न तो वीसी को है, न उनके हस्ताक्षरों से नियुक्त चेयरपर्सन को। हैरानी यह है कि केन्द्र सरकार पहले ही इस पीठ को नि्क्रिरयता के चलते निरस्त कर चुकी है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन बेखबर है।
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर बनी अम्बेडकर पीठ कब खत्म हो गई, इसकी जानकारी न तो वीसी को है, न उनके हस्ताक्षरों से नियुक्त चेयरपर्सन को। हैरानी यह है कि केन्द्र सरकार पहले ही इस पीठ को नि्क्रिरयता के चलते निरस्त कर चुकी है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन बेखबर है। दैनिक नवज्योति ने इस गंभीर मुद्दे पर वीसी से सवाल किया तो उन्होंने सवाल सुनने के बाद फोन काट दिया। दैनिक नवज्योति ने इस मामले में पड़ाताल शुरू की तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानकारी नहीं दी तो आरटीआई लगाई, जिसका जवाब आया : राजस्थान विश्वविद्यालय में अम्बेडकर पीठ को उसकी नि्क्रिरयता के कारण सक्षम प्राधिकारी द्वारा नोट संख्या रअ/एड/50681 के अनुमोदन उपरांत निरस्त कर दिया गया है।वीसी ने मार्च 2025 में कर दी थी नियुक्ति, लेकिन चेयर पहले ही खत्म हो चुकी थी
चौंकाने वाली बात यह है कि कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने मार्च 2025 में विधि विभाग के डॉ. तरुण कुमार जोरवाल को अम्बेडकर पीठ का चेयरमैन नियुक्त किया था। यानी, जिस पीठ को केन्द्र सरकार समाप्त कर चुकी थी, उसी पर विश्वविद्यालय नियुक्तियां करता रहा।
सवाल सुनते ही फोन काटा
कई बार संपर्क करने पर वीसी अल्पना कटेजा ने एक बार फोन उठाया, लेकिन प्रश्न सुनने के बाद फोन काट दिया। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप, सामान्य संदेश और वॉयस नोट भेजे गए, लेकिन उत्तर नहीं दिया।
अम्बेडकर पीठ बनी कबाड़खाना
पीठ की स्थिति भी शर्मनाक है। कमरे में कबाड़ भरा है। क्लर्क तक नहीं। पीएचडी, एमफिल या सर्टिफिकेट कोर्स की अनुमति भी नहीं।
पीठ क्यों जरूरी
यह शिक्षा को सामाजिक न्याय की प्रयोगशाला बनाती है। यह पीठ संविधान, समता, बंधुता, जाति उन्मूलन, जेंडर इक्वलिटी और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर अकादमिक विमर्श को संस्थागत करती है। वंचितों और उपेक्षितों को मुख्य धारा में लाती है।
देशभर में 26 चेयर, आरयू की हुई निरस्त
बीएचयू, जेएनयू, एएमयू जैसे विश्वविद्यालयों में सक्रिय शोध
डॉ. अम्बेडकर प्रतिष्ठान ने देश के 26 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को अम्बेडकर चेयर आवंटित की थी।
इनमें बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे संस्थान शामिल हैं, जहां
संविधान सामाजिक-आर्थिक न्याय डॉ. अम्बेडकर के विचारों पर शोध कार्य हो रहा है और इसके लिए केन्द्र सरकार फंडिंग उपलब्ध कराती है। लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय में लगातार उपेक्षा के चलते चेयर ही खत्म कर दी गई।
पीठ निरस्त की जानकारी नहीं
मुझे मार्च 2025 में चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इसकी मान्यता समाप्त हो चुकी है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
-डॉ. तरुण कुमार जोरवाल,
निवर्तमान चेयरमैन
छात्र संघर्ष करेंगे
सामाजिक न्याय के पुरोधाओं के प्रति विश्वविद्यालय का रवैया ठीक नहीं है। आजादी के आठ दशक बाद भी अम्बेडकर चेयर का इस तरह खत्म होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
-डॉ. सज्जन कुमार सैनी, पोस्ट डॉक्टोरल फेलो, राजस्थान विश्वविद्यालय
सामाजिक न्याय को नुकसान
राजस्थान विश्वविद्यालय की उदासीनता के चलते अम्बेडकर चेयर नि्क्रिरय रही और अंतत: निरस्त कर दी गई। कुछ समय पहले ज्योतिबा फुले को भी पाठ्यक्रम से हटाया गया था। यह चिंता का विषय है।
-टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष,
राजस्थान विधानसभा

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