कृषि कमिश्नर नरेश कुमार गोयल का बड़ा एक्शन : खैरथल के प्रमोद योगी सहित 100 किसानों को कोटा में मिलेगी ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग, मंच से ही दिए निर्देश
एक बेहद संवेदनशील और एक्शन-ओरिएंटेड अंदाज देखने को मिला
जयपुर । राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) के लेक्चर रूम में फिक्की (एफआईसीसीआई) की ओर से आयोजित 'नेशनल मस्टर्ड डे' (राष्ट्रीय सरसों दिवस) कार्यक्रम में कृषि कमिश्नर नरेश कुमार गोयल (आईएएस) का एक बेहद संवेदनशील और एक्शन-ओरिएंटेड अंदाज देखने को मिला। प्रदेश में ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) को बढ़ावा देने के लिए कमिश्नर ने सीधे मंच से ही मोबाइल फोन मिलाया। उन्होंने खैरथल निवासी किसान प्रमोद योगी सहित उनके साथ मौजूद सौ से अधिक किसानों को ऑर्गेनिक खेती की विशेष ट्रेनिंग दिलाने के लिए तुरंत फोन पर बात की।
इन सभी किसानों को जैविक खेती के गुर सिखाने के लिए कोटा में ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी।कमिश्नर गोयल ने फोन का स्पीकर ऑन रखकर बात की और तत्काल अलवर के कृषि अधिकारी को कड़े निर्देश देते हुए कहा, "आप प्रमोद योगी और इन सभी किसानों का मोबाइल नंबर तुरंत नोट कीजिए। ये आपके पास आएंगे। इन्हें कोटा में ट्रेनिंग दिलवाने का काम करवाकर मुझे आज ही अपडेट मिलना चाहिए।" कृषि कमिश्नर के इस त्वरित और अनोखे एक्शन की हॉल में मौजूद सभी किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने तालियां बजाकर सराहना की।मुख्यमंत्री खुद किसान, उनकी चिंता खेती को उन्नत बनाना: नरेश कुमार गोयलकार्यक्रम में उपस्थित किसानों और कृषि विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कृषि कमिश्नर नरेश कुमार गोयल ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा खुद एक किसान परिवार से आते हैं। वे हमेशा किसानों की समस्याओं और उनकी आय बढ़ाने के लिए चिंतित रहते हैं।
गोयल ने बताया कि सरकार का पूरा ध्यान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, यूरिया वितरण प्रणाली और किसान ऋण योजना में हुए हालिया बदलावों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने पर है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बिचौलियों को खत्म कर किसानों के उत्पादों को सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए ताकि उन्हें अपनी फसल का सही और अधिकतम मूल्य मिल सके।राष्ट्रीय सरसों दिवस पर जुटे देश के दिग्गज कृषि वैज्ञानिक और उद्योग विशेषज्ञफिक्की द्वारा शुक्रवार सुबह 10:30 बजे आयोजित इस पैनल डिस्कशन (चर्चा) में देश भर से कृषि और उद्योग जगत के कई दिग्गज शामिल हुए।
चर्चा का मुख्य केंद्र सरसों की उत्पादकता बढ़ाना, नई कृषि तकनीकों को अपनाना और जैविक खेती को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में शामिल प्रमुख पैनलिस्टों (वक्ताओं) ने अपने विचार साझा किए:डॉ. एस.के. मल्होत्रा (कुलपति, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल व पूर्व कृषि एवं बागवानी आयुक्त, भारत सरकार) ने सरसों की नई उन्नत किस्मों और बागवानी तकनीकों पर प्रकाश डाला। राम प्रताप सिहाग (अतिरिक्त निदेशक कृषि, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार) ने हरियाणा में सरसों उत्पादन के सफल मॉडल और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। जे.बी. अग्रवाल (एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट व बिजनेस हेड - मस्टर्ड वर्टिकल, पतंजलि फूड्स) ने सरसों के तेल के बाजार, मांग और किसानों को मिलने वाले उचित मूल्य पर कॉर्पोरेट विजन (व्यावसायिक दृष्टिकोण) रखा। अर्जुन राजपूत (क्रॉप मार्केटिंग लीड - मिलेट एंड मस्टर्ड - दक्षिण एशिया, कोर्टेवा एग्रीसाइंस) ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए आधुनिक बीज तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
डॉ. सुदीप्ति अरोड़ा (निदेशक - अनुसंधान और नवाचार, डॉ. बी. लाल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी) ने जैविक खेती में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका और इसके फायदों को रेखांकित किया।इस सफल सेमिनार (संगोष्ठी) में आए किसानों को जैविक खेती अपनाने, आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी उपज बेचने के लिए प्रेरित किया गया। फिक्की के इस मंच ने वैज्ञानिकों, सरकार और उद्योग जगत को एक साथ लाकर सरसों की खेती के भविष्य को एक नई दिशा देने का काम किया है।

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